स्वास्थ्य

MetabolismHealth – शरीर को 440 वॉट का झटका देने की क्षमता रखता है धीमा मेटाबॉलिज्म

MetabolismHealth – आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में थकान, वजन बढ़ना और दिनभर सुस्ती महसूस होना आम बात बन गई है। अक्सर लोग इसे खराब खानपान, तनाव या नींद की कमी से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मामलों में इसकी असली वजह शरीर का धीमा मेटाबॉलिज्म हो सकता है। मेटाबॉलिज्म शरीर की वह जैविक प्रक्रिया है, जो खाने को ऊर्जा में बदलती है। जब यह प्रक्रिया सुस्त हो जाती है, तो शरीर की कार्यक्षमता पर सीधा असर पड़ने लगता है।

slow metabolism body warning signs

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मेटाबॉलिज्म धीमा होने पर शरीर में क्या बदलता है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्लो मेटाबॉलिज्म का मतलब केवल वजन बढ़ना नहीं होता। इसका असर हार्मोन बैलेंस, एनर्जी लेवल और शरीर के आंतरिक सिस्टम पर भी पड़ता है। समय रहते इसके संकेत पहचान लिए जाएं, तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

बिना ज्यादा खाए भी वजन तेजी से बढ़ना

अगर कम खाने के बावजूद वजन लगातार बढ़ रहा है, तो यह धीमे मेटाबॉलिज्म का बड़ा संकेत हो सकता है। इस स्थिति में शरीर कैलोरी को सही ढंग से बर्न नहीं कर पाता और अतिरिक्त ऊर्जा फैट के रूप में जमा होने लगती है। खासकर पेट और कमर के आसपास चर्बी तेजी से बढ़ती है, जिसे कम करना बाद में मुश्किल हो जाता है।

पाचन तंत्र का सुस्त हो जाना

धीमा मेटाबॉलिज्म पाचन प्रणाली को भी प्रभावित करता है। ऐसे लोगों को अक्सर कब्ज, गैस या पेट भारी रहने की शिकायत रहती है। खाना पचने में अधिक समय लगने लगता है, जिससे शरीर पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे, तो पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

सामान्य से ज्यादा ठंड लगना

अगर आपको आसपास के लोगों की तुलना में ज्यादा ठंड महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मेटाबॉलिज्म शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। इसके धीमे होने पर शरीर पर्याप्त गर्मी पैदा नहीं कर पाता, जिससे बार-बार ठंड लगने की समस्या सामने आती है।

त्वचा और बालों में दिखने लगते हैं बदलाव

मेटाबॉलिज्म के सुस्त होने का असर त्वचा और बालों पर भी साफ दिखाई देता है। त्वचा रूखी, बेजान और खिंची हुई लगने लगती है। वहीं बाल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं। इसकी वजह यह होती है कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व और ऊर्जा समय पर नहीं मिल पाती।

पर्याप्त नींद के बाद भी सुस्ती महसूस होना

अगर आप पूरी नींद लेने के बावजूद दिनभर उनींदापन महसूस करते हैं, तो यह भी स्लो मेटाबॉलिज्म का संकेत हो सकता है। जब शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलने में सक्षम नहीं होता, तो एनर्जी लेवल लगातार कम बना रहता है। इसका असर काम की क्षमता, फोकस और मानसिक सतर्कता पर पड़ता है।

मीठा खाने की बढ़ती इच्छा

धीमे मेटाबॉलिज्म वाले लोगों में मीठा या हाई कैलोरी फूड खाने की चाह ज्यादा देखी जाती है। जब शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती, तो वह तुरंत ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों की मांग करने लगता है। इससे शुगर और जंक फूड की क्रेविंग बढ़ जाती है, जो आगे चलकर वजन और ब्लड शुगर की समस्या पैदा कर सकती है।

हर समय थकान और चिड़चिड़ापन

आराम करने के बाद भी अगर थकान बनी रहती है, तो इसे सामान्य न समझें। स्लो मेटाबॉलिज्म के कारण शरीर को भोजन से पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे बिना ज्यादा काम किए भी थकावट महसूस होती है। इसके साथ ही मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

समय रहते संकेतों को समझना क्यों जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, स्लो मेटाबॉलिज्म लंबे समय तक बना रहे तो बीपी, कोलेस्ट्रॉल, शुगर और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और सही दिनचर्या अपनाकर मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखा जा सकता है। किसी भी लक्षण के लंबे समय तक बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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