SleepHealth – बेहतर नींद के लिए सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना जरूरी
SleepHealth – आज की डिजिटल जिंदगी में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारे रोजमर्रा का हिस्सा बन चुके हैं। दिनभर काम के बाद भी लोग सोने से पहले स्क्रीन से दूरी नहीं बना पाते, जिसका सीधा असर उनकी नींद पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रात में अच्छी और गहरी नींद न मिलना कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को जन्म दे सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल हमारी नींद को किस तरह प्रभावित करता है और इससे बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

ब्लू लाइट और नींद के बीच संबंध
स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे शरीर के प्राकृतिक स्लीप साइकिल को प्रभावित करती है। यह रोशनी दिमाग को यह संकेत देती है कि अभी दिन का समय है, जिससे मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है। यही हार्मोन नींद लाने में मदद करता है। जब इसका स्तर प्रभावित होता है, तो नींद आने में देर लगती है और कई बार नींद बार-बार टूटती भी है। यही वजह है कि देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत धीरे-धीरे स्लीप क्वालिटी को कमजोर कर देती है।
सोने से पहले स्क्रीन बंद करने का सही समय
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी तरह की स्क्रीन से दूरी बना लेनी चाहिए। हालांकि शुरुआत में यह थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे इसे आदत में बदला जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति एकदम से एक घंटा स्क्रीन बंद नहीं कर पा रहा है, तो वह पहले 20 से 30 मिनट से शुरुआत कर सकता है और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ा सकता है।
रूटीन तय करने से मिलती है मदद
एक तय समय पर सोने की आदत बनाने से स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना आसान हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आप रोज रात 10 बजे सोने का समय तय करते हैं, तो 9 बजे के बाद स्क्रीन का उपयोग बंद कर सकते हैं। नियमित रूटीन शरीर को संकेत देता है कि अब आराम का समय है, जिससे नींद जल्दी और बेहतर आती है।
फोन को दूर रखना क्यों जरूरी है
कई लोग सोते समय भी फोन को अपने पास रखते हैं, जिससे बार-बार नोटिफिकेशन देखने की आदत बनी रहती है। इससे नींद बाधित होती है। बेहतर होगा कि फोन को बिस्तर से थोड़ी दूरी पर रखा जाए। इससे न केवल स्क्रीन देखने की आदत कम होगी, बल्कि रात में बार-बार ध्यान भटकने से भी बचाव होगा।
रात के समय रिलैक्सिंग गतिविधियों को अपनाएं
स्क्रीन टाइम कम करने का मतलब यह नहीं है कि आप खाली बैठें। इसके बजाय आप कुछ शांत और आरामदायक गतिविधियों को अपनाकर अपने दिमाग को रिलैक्स कर सकते हैं। जैसे किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना, ध्यान करना या परिवार के साथ समय बिताना। ये आदतें शरीर को धीरे-धीरे नींद के लिए तैयार करती हैं।
नाइट मोड और लाइटिंग का सही इस्तेमाल
अगर किसी कारण से रात में फोन या लैपटॉप का इस्तेमाल करना जरूरी हो, तो नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का उपयोग किया जा सकता है। इससे आंखों पर कम असर पड़ता है। इसके साथ ही कमरे में तेज सफेद रोशनी की बजाय हल्की और गर्म रोशनी का इस्तेमाल करना बेहतर होता है, जिससे शरीर को आराम मिलता है और नींद आने में आसानी होती है।
छोटे बदलाव से बेहतर परिणाम
स्क्रीन टाइम कम करना एक दिन में संभव नहीं होता, लेकिन छोटे-छोटे बदलावों से इसकी शुरुआत की जा सकती है। धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है और इसका सकारात्मक असर नींद की गुणवत्ता पर साफ नजर आने लगता है। नियमित और संतुलित दिनचर्या अपनाकर बेहतर नींद पाना संभव है।



