स्वास्थ्य

SugarcaneJuice – मार्च-अप्रैल में गन्ने का जूस पीना क्यों माना गया है नुकसानदायक…

SugarcaneJuice – गर्मियों की शुरुआत होते ही ठंडे पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है और सड़क किनारे मिलने वाला गन्ने का जूस कई लोगों की पहली पसंद बन जाता है। इसका मीठा और ठंडक देने वाला स्वाद लोगों को तुरंत राहत देता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि हर मौसम में इसका सेवन समान रूप से लाभकारी नहीं होता। खासतौर पर मार्च और अप्रैल के महीनों में इसे पीने से बचने की सलाह दी जाती है।

avoid sugarcane juice march april health tips

चैत्र माह में गन्ने की गुणवत्ता पर सवाल

आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, चैत्र मास यानी मार्च और अप्रैल तक आते-आते गन्ने की ताजगी कम हो जाती है। लंबे समय तक खेतों या भंडारण में रहने के कारण इसमें प्राकृतिक बदलाव आने लगते हैं। कई बार इसमें हल्की खमीर उठने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है, जो सामान्य रूप से दिखाई नहीं देती, लेकिन इसका असर जूस की गुणवत्ता पर पड़ता है। ऐसे गन्ने से तैयार किया गया जूस शरीर के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

मौसम बदलने के साथ शरीर पर प्रभाव

यह समय सर्दी से गर्मी की ओर संक्रमण का होता है, जब शरीर में कफ से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। गन्ने का जूस स्वभाव से ठंडा और मीठा होता है, जो कफ को और बढ़ा सकता है। इसके कारण सर्दी-जुकाम, गले में खराश और सुस्ती जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। कुछ लोगों में यह पाचन तंत्र को भी प्रभावित करता है, जिससे एसिडिटी या त्वचा से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

खानपान में किन चीजों से रखें दूरी

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इन महीनों में केवल गन्ने के जूस ही नहीं, बल्कि ज्यादा खट्टी और फर्मेंटेड चीजों का सेवन भी सीमित करना चाहिए। अधिक मात्रा में दही या भारी, तैलीय भोजन लेने से पाचन पर असर पड़ सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर में आलस्य बढ़ाते हैं और कई बार त्वचा संबंधी समस्याओं को भी जन्म दे सकते हैं।

हल्के और ताजे भोजन पर दें ध्यान

आयुर्वेद के अनुसार, इस समय शरीर को हल्का और संतुलित भोजन की जरूरत होती है। मूंग दाल, सत्तू और हरी सब्जियां जैसे विकल्प पाचन के लिए बेहतर माने जाते हैं। ये शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ उसे संतुलित भी रखते हैं। इस दौरान ताजे और कम मसाले वाले भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।

डिटॉक्स के लिए भी माना जाता है उपयुक्त समय

विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च और अप्रैल का समय शरीर को अंदर से साफ करने के लिए भी उपयुक्त होता है। कुछ आयुर्वेदाचार्य इस दौरान नीम के पत्तों के सेवन की भी सलाह देते हैं, जिसे शरीर की सफाई के लिए उपयोगी माना जाता है। हालांकि, इसका सेवन सीमित मात्रा में और सही जानकारी के साथ ही करना चाहिए।

मौसम के अनुसार खानपान में बदलाव करना भारतीय परंपरा और आयुर्वेद का अहम हिस्सा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाए और विशेषज्ञों की सलाह को समझकर अपनाया जाए।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.