स्वास्थ्य

VitaminDDeficiency – ऑफिस लाइफस्टाइल से बढ़ रही है कमी, जानें जरूरी टेस्ट

VitaminDDeficiency – शहरी जीवनशैली में बदलाव के साथ विटामिन D की कमी एक आम लेकिन अनदेखी समस्या बनती जा रही है। सुबह से शाम तक दफ्तरों में काम, सीमित धूप और लंबे समय तक बंद कमरों में बैठना इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। पहले यह समस्या मुख्य रूप से वयस्कों में देखी जाती थी, लेकिन अब बच्चों में भी इसकी कमी के मामले सामने आ रहे हैं। स्कूल और घर के बीच सीमित आउटडोर गतिविधियां उन्हें भी जोखिम में डाल रही हैं।

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क्यों बढ़ रही है यह कमी

राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में भारतीयों में विटामिन D का स्तर सामान्य से कम पाया गया है। इसे सनशाइन विटामिन कहा जाता है क्योंकि शरीर इसे मुख्य रूप से सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने पर बनाता है। लेकिन आजकल अधिकांश लोग दिन का बड़ा हिस्सा कार्यालय या घर के अंदर बिताते हैं। इसके अलावा प्रदूषण, अत्यधिक सनस्क्रीन का उपयोग और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत भी इसके स्तर को प्रभावित कर सकती है। मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता भी जोखिम कारक माने जाते हैं।

शरीर पर संभावित प्रभाव

विटामिन D की कमी का असर सिर्फ हड्डियों तक सीमित नहीं रहता। लगातार थकान, मांसपेशियों में दर्द, बार-बार संक्रमण और मूड में बदलाव इसके संकेत हो सकते हैं। लंबे समय तक कमी रहने पर हड्डियों की मजबूती कम हो सकती है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। कुछ शोध यह भी बताते हैं कि इम्यून सिस्टम और हृदय स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ सकता है। ऑफिस जॉब करने वाले लोगों को खास सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक बैठकर काम करने से हड्डियों और मांसपेशियों की सक्रियता कम हो जाती है।

किन टेस्ट से मिल सकती है जानकारी

विशेषज्ञ समय-समय पर कुछ जांच कराने की सलाह देते हैं।
सबसे अहम है 25-Hydroxy Vitamin D टेस्ट, जिससे रक्त में इसकी वास्तविक मात्रा का पता चलता है।
कैल्शियम स्तर की जांच भी जरूरी हो सकती है, क्योंकि विटामिन D इसके अवशोषण में मदद करता है।
यदि लंबे समय से कमी बनी हुई हो, तो Bone Mineral Density टेस्ट हड्डियों की मजबूती का आकलन कर सकता है।
थायरॉयड फंक्शन टेस्ट भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि थकान के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं।
मैग्नीशियम स्तर की जांच से यह समझा जा सकता है कि शरीर विटामिन D को सक्रिय रूप में बदल पा रहा है या नहीं।

कैसे रखें खुद को सुरक्षित

रोजाना कम से कम 15 से 20 मिनट सुबह की हल्की धूप लेना फायदेमंद माना जाता है। आहार में अंडा, मशरूम, फोर्टिफाइड दूध और कुछ प्रकार की मछली शामिल की जा सकती है। किसी भी सप्लीमेंट का सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच से कमी का समय रहते पता लगाया जा सकता है और उचित कदम उठाए जा सकते हैं।

विटामिन D की कमी को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। संतुलित जीवनशैली, पर्याप्त धूप और नियमित जांच से इस समस्या को नियंत्रित रखा जा सकता है।

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