AfghanPakistanTension – रूस और चीन ने टकराव रोकने की अपील
AfghanPakistanTension – अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड रेखा के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। हालिया झड़पों में दोनों ओर से हताहतों की खबरों के बीच रूस और चीन सहित कई देशों ने तत्काल संघर्ष विराम और बातचीत की अपील की है।

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने बयान जारी कर कहा कि सीमा पर हुई झड़पों में सैनिकों के साथ नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दोनों देशों को “खतरनाक टकराव” समाप्त कर राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से मतभेद सुलझाने का आग्रह किया।
चीन ने भी की संयम की अपील
बीजिंग की ओर से भी समान स्वर सुनाई दिए। चीन के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान से शांति बनाए रखने और विवाद को संवाद के जरिए सुलझाने की अपील की। चीन ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय स्थिरता सभी पक्षों के हित में है और सैन्य टकराव से हालात और जटिल हो सकते हैं।
कई अन्य देशों ने भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम लागू करने का आग्रह किया है।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भी स्थिति पर चिंता जताई है। उनके प्रवक्ता के अनुसार, सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है। संयुक्त राष्ट्र ने यह भी दोहराया कि सीमा विवाद और सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान बातचीत से ही संभव है।
तालिबान सरकार का रुख
काबुल में तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने प्रेस वार्ता में कहा कि अफगानिस्तान शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर है। उन्होंने कहा कि सरकार अब भी संवाद के लिए तैयार है और चाहती है कि विवाद बातचीत की मेज पर सुलझाया जाए।
वर्तमान तनाव का एक प्रमुख कारण तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद हैं। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि प्रतिबंधित संगठन को अफगान सीमा क्षेत्र में सुरक्षित पनाह मिलती है, जबकि काबुल इन आरोपों को खारिज करता है।
डूरंड रेखा: विवाद की जड़
डूरंड रेखा, जो लगभग 2,611 किलोमीटर लंबी सीमा है, 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान निर्धारित की गई थी। पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि अफगानिस्तान की वर्तमान और पूर्व सरकारों ने इसे औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।
समय-समय पर इसी सीमा को लेकर दोनों देशों के बीच गोलीबारी और कूटनीतिक तनातनी होती रही है। हालिया झड़पों में सैन्य ठिकानों और नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।
सीमा पर तनाव कम करने के संकेत
इस्लामाबाद के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, कुछ सीमा चौकियों पर अफगान पक्ष की ओर से सफेद झंडे लहराए गए, जिसे आमतौर पर संघर्ष विराम के संकेत के रूप में देखा जाता है। हालांकि दोनों देशों की ओर से आधिकारिक स्तर पर विस्तृत बयान अभी भी सीमित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका असर व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल वैश्विक समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश कूटनीतिक रास्ता अपनाते हैं या तनाव और बढ़ता है।



