EpsteinFiles – एपस्टीन जांच दस्तावेज़ों में गोपनीयता चूक पर न्यायिक सुनवाई तय
EpsteinFiles – अमेरिकी वित्तीय अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े जांच रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने के बाद न्याय विभाग (DOJ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में जारी किए गए तीन मिलियन से अधिक दस्तावेज़ों में कई पीड़ितों की पहचान और निजी जानकारी बिना किसी संपादन के सामने आ गई, जिससे उनकी सुरक्षा और निजता दोनों जोखिम में पड़ गई हैं। कानूनी विशेषज्ञों ने इसे “उभरता हुआ संकट” बताते हुए सरकारी वेबसाइट से इन फाइलों को तत्काल हटाने की मांग की है। इसी मामले में मैनहट्टन के संघीय न्यायाधीश रिचर्ड एम बर्मन ने बुधवार, 4 फरवरी को सुनवाई तय की है, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी भूमिका सीमित हो सकती है।

पीड़ितों की पहचान उजागर होने पर वकीलों की आपत्ति
फ्लोरिडा स्थित लॉ फर्म एडवर्ड्स हेंडरसन के वकील ब्रैड एडवर्ड्स और ब्रिटनी हेंडरसन ने अदालत को लिखे पत्र में बताया कि जारी दस्तावेज़ों में कई बेहद संवेदनशील विवरण सार्वजनिक कर दिए गए हैं। उनके अनुसार, एक ईमेल में 32 नाबालिग पीड़ितों की सूची शामिल थी, जिसमें केवल एक नाम हटाया गया था जबकि 31 के नाम साफ दिखाई दे रहे थे। इसके अलावा, एक महिला ने शिकायत की कि उसका पूरा आवासीय पता भी फाइलों में उपलब्ध करा दिया गया। वकीलों का कहना है कि इससे पीड़ितों को प्रताड़ना, धमकी और सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए इन दस्तावेज़ों को तुरंत हटाया जाना चाहिए।
अदालत और न्याय विभाग की प्रतिक्रिया
जिला न्यायाधीश रिचर्ड एम बर्मन ने अपने आदेश में कहा कि वे निर्धारित तारीख पर सुनवाई करेंगे, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि उनके पास इस स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित करने के सीमित विकल्प हो सकते हैं। इस बीच, न्याय विभाग ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि वह फाइलों में अतिरिक्त संशोधन करने के लिए लगातार काम कर रहा है। यह कदम तब उठाया गया जब न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकारों ने दर्जनों नग्न तस्वीरों में लोगों के चेहरे पहचानने योग्य पाए थे। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में इनमें से अधिकांश तस्वीरों को या तो हटा दिया गया या भारी रूप से धुंधला कर दिया गया।
ट्रंप की टिप्पणी और दस्तावेज़ों में क्या है?
दस्तावेज़ सार्वजनिक होने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने स्वयं फाइलें नहीं देखी हैं, लेकिन उन्हें बताया गया है कि यह सामग्री उनके लिए राहत देने वाली है और उनके आलोचकों की उम्मीदों के विपरीत है। मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड में एपस्टीन और ब्रिटिश राजघराने से जुड़े माउंटबेटन-विंडसर परिवार के साथ उसकी जान-पहचान से संबंधित दस्तावेज़ शामिल हैं। इसके अलावा, ट्रंप के पूर्व सलाहकार स्टीव बैनन, न्यूयॉर्क जायंट्स के सह-मालिक स्टीव टिस्क तथा अरबपति बिल गेट्स और एलन मस्क के साथ एपस्टीन के ईमेल आदान-प्रदान भी इन फाइलों का हिस्सा हैं।
व्यापक चिंता: पारदर्शिता बनाम सुरक्षा
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह मामला पारदर्शिता और व्यक्तिगत सुरक्षा के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा है। एक ओर सार्वजनिक हित में जांच दस्तावेज़ जारी करना जरूरी माना जाता है, वहीं दूसरी ओर पीड़ितों की पहचान उजागर होना न्याय प्रणाली के प्रति उनके भरोसे को कमजोर करता है। नागरिक अधिकार संगठनों ने भी कहा है कि सरकारी एजेंसियों को संवेदनशील जानकारी संभालते समय कहीं अधिक सतर्क रहना चाहिए।
आगे क्या होगा?
आगामी सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि दस्तावेज़ों की सार्वजनिक उपलब्धता पर अस्थायी रोक लगाई जाए या नहीं। साथ ही, न्याय विभाग को यह बताना होगा कि भविष्य में ऐसी चूक रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल एपस्टीन मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है, बल्कि डिजिटल युग में डेटा सुरक्षा और पीड़ितों के अधिकारों पर भी नई बहस छेड़ दी है।



