Sydney Terror Attack: ISIS कनेक्शन की आशंका! कार में झंडा मिलने के बाद खंगाले गए नवीद के पुराने रिकॉर्ड
Sydney Terror Attack: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यहूदियों के एक धार्मिक त्योहार के दौरान हुए इस हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह हमला पूरी प्लानिंग और कट्टरपंथी सोच के साथ अंजाम दिया गया। ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक (Sydney terror attack) देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी बनकर उभरा है।

हमलावरों की पहचान और पाकिस्तान कनेक्शन
जांच एजेंसियों ने हमले में शामिल दोनों हमलावरों की पहचान बाप-बेटे के रूप में की है, जो पाकिस्तान के नागरिक बताए जा रहे हैं। मुख्य हमलावर साजिद और उसका बेटा नवीद इस हमले को अंजाम देने के लिए पूरी तरह हथियारों से लैस थे। घटना के बाद यह खुलासा हुआ कि दोनों लंबे समय से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे थे। इस खुलासे के बाद (Pakistani nationals) से जुड़े सुरक्षा और वीजा सिस्टम पर भी सवाल उठने लगे हैं।
ISIS से सीधा लिंक और सबूत
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावरों का कनेक्शन कुख्यात आतंकी संगठन आईएसआईएस से पाया गया है। घटनास्थल के पास खड़ी कार से आईएसआईएस का झंडा बरामद होना इस लिंक को और मजबूत करता है। इसके अलावा उसी कार से एक विस्फोटक भी मिला है, जिससे यह साफ हो गया कि हमला और भी बड़े स्तर पर किया जा सकता था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि (ISIS links) इस पूरे मामले की दिशा और गंभीरता को पूरी तरह बदल देते हैं।
हथियारों का जखीरा और मौके पर मौत
जानकारी के मुताबिक साजिद के पास लाइसेंसी हथियार थे और उसके पास कम से कम छह बंदूकें मौजूद थीं। वहीं उसके बेटे नवीद के पास भी कई हथियार पाए गए। हमले के दौरान साजिद की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि नवीद गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती है। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में हथियारों की मौजूदगी (licensed weapons) सिस्टम की बड़ी चूक को भी उजागर करती है।
स्टूडेंट वीजा से परमानेंट रेजिडेंसी तक का सफर
जांच में यह भी सामने आया है कि साजिद 1998 में स्टूडेंट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया आया था और 2001 में उसे परमानेंट वीजा मिल गया। इसके बाद वह तीन बार विदेश यात्रा भी कर चुका था। सुरक्षा एजेंसियां अब उसकी यात्राओं और संपर्कों की गहराई से जांच कर रही हैं। यह मामला (visa security) को लेकर भी गंभीर बहस को जन्म दे रहा है कि कैसे ऐसे लोग लंबे समय तक रडार से बाहर रहे।
नवीद पर पहले भी हो चुकी थी जांच
एबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, नवीद की आतंकी गतिविधियों को लेकर पहले भी जांच हो चुकी है। ऑस्ट्रेलिया की खुफिया एजेंसी ASIO ने 2019 में उसके आईएसआईएस से जुड़े होने की जांच की थी। उस दौरान वह इसाक अल मतारी जैसे आतंकी के संपर्क में पाया गया था, जो सात साल जेल की सजा काट चुका है। यह तथ्य (ASIO investigation) एजेंसियों की पुरानी चेतावनियों को फिर से सामने लाता है।
प्रधानमंत्री की पुष्टि और बढ़ती चिंताएं
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने भी स्वीकार किया है कि नवीद अकरम 2019 में सुरक्षा एजेंसियों के शक के दायरे में आ चुका था। इसके बावजूद वह खुले तौर पर घूमता रहा और आखिरकार इतने बड़े हमले को अंजाम दे दिया। इस बयान के बाद सरकार पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर (national security) से जुड़े इनपुट्स को समय रहते गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।
ईरान लिंक की आशंका और कूटनीतिक तनाव
अधिकारियों का कहना है कि इस हमले का ईरान से भी संभावित कनेक्शन हो सकता है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने ईरान के राजदूत को निष्कासित किया था और ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकी संगठन घोषित किया गया है। ईरान से जुड़े कट्टरपंथी संगठन इजरायलियों और यहूदियों को निशाना बनाते रहे हैं, जिससे इस हमले की टाइमिंग और टारगेट पर सवाल खड़े होते हैं। यह पूरा घटनाक्रम (Iran terror link) को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के लिए बड़ा सुरक्षा अलर्ट
बोंडी बीच हमला सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा अलार्म है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके। यह मामला बताता है कि वैश्विक आतंकवाद किस तरह सीमाओं से परे जाकर (global terrorism) की चुनौती बन चुका है।



