अंतर्राष्ट्रीय

IranDrones – ईरानी ड्रोन हमलों से निपटने में यूक्रेन की तकनीक पर बदला अमेरिका का रुख

IranDrones – यूक्रेन ने लगभग सात महीने पहले अमेरिका को एक ऐसी सैन्य तकनीक अपनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे खास तौर पर ईरान में बने हमलावर ड्रोन को रोकने के लिए विकसित किया गया है। यूक्रेनी अधिकारियों का दावा है कि यह प्रणाली युद्ध के मैदान में पहले ही कारगर साबित हो चुकी है। हालांकि उस समय ट्रंप प्रशासन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था और इसके पीछे की वजह भी स्पष्ट नहीं की गई थी।

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यूक्रेन की ओर से दी गई ब्रीफिंग में बताया गया था कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, तो यह तकनीक अमेरिकी सैनिकों और उनके सहयोगी देशों की सेनाओं को ड्रोन हमलों से बचाने में मदद कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कीव ने इस तकनीक के काम करने के तरीके और उसके संभावित रणनीतिक लाभों पर विस्तार से जानकारी दी थी।

ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के बाद बदला रुख

हालिया घटनाओं के बाद अमेरिका के रुख में बदलाव देखा जा रहा है। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी ड्रोन हमले उम्मीद से कहीं अधिक व्यापक और प्रभावशाली साबित हुए हैं। इसी कारण वॉशिंगटन ने पिछले सप्ताह इस मुद्दे पर अपने पुराने फैसले की समीक्षा शुरू की।

सूत्रों के अनुसार अब अमेरिकी अधिकारी निजी तौर पर मान रहे हैं कि यूक्रेन के प्रस्ताव को नजरअंदाज करना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चूक हो सकती है। खासतौर पर 28 फरवरी को ईरान के साथ शुरू हुए सैन्य टकराव के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है और इससे निपटने के लिए नई रणनीतियों की आवश्यकता है।

शाहेद ड्रोन से बढ़ी अमेरिकी सेना की चुनौतियां

ईरान के शाहेद ड्रोन कम लागत वाले लेकिन प्रभावी हथियार माने जाते हैं। इनका इस्तेमाल कई संघर्ष क्षेत्रों में किया जा चुका है और हाल के घटनाक्रमों में भी इनकी भूमिका सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन ड्रोन हमलों को सात अमेरिकी सैनिकों की मौत से जोड़ा गया है।

इन ड्रोन को रोकने के प्रयासों में अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। कई बार इन कम लागत वाले ड्रोन को गिराने के लिए महंगे एयर डिफेंस सिस्टम या मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे रक्षा खर्च तेजी से बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसी कारण ड्रोन रोधी सस्ती और प्रभावी तकनीक की मांग बढ़ रही है।

यूक्रेन का दावा, अमेरिका ने मांगी सहयोग की पेशकश

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हाल ही में कहा कि अमेरिका और पश्चिम एशिया के कुछ सहयोगी देश ईरानी ड्रोन से निपटने के लिए यूक्रेन के अनुभव और तकनीक में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। उनके अनुसार कई देशों ने इस विषय पर सहयोग की संभावना तलाशने के लिए संपर्क किया है।

जेलेंस्की ने बताया कि उन्होंने हाल के दिनों में संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत के नेताओं के साथ बातचीत की है। इन चर्चाओं में क्षेत्रीय सुरक्षा और ड्रोन हमलों से बचाव के उपायों पर विचार किया गया। यूक्रेन का दावा है कि रूस के साथ युद्ध के दौरान उसने ड्रोन हमलों का सामना करते हुए कई व्यावहारिक समाधान विकसित किए हैं।

सहायता देने से पहले यूक्रेन की स्पष्ट शर्त

जेलेंस्की ने यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन किसी भी देश को सैन्य सहायता तभी देगा जब इससे उसकी अपनी सुरक्षा प्रभावित न हो। उनका कहना है कि रूस के साथ जारी संघर्ष के कारण यूक्रेन को अपनी रक्षा क्षमता बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यूक्रेन उन देशों की मदद करने के लिए तैयार है जो उसकी सहायता कर रहे हैं और जो रूस के साथ चल रहे युद्ध के न्यायपूर्ण समाधान के प्रयासों का समर्थन करते हैं। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए ही सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

वैश्विक ध्यान में बदलाव की चिंता

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने यह चिंता भी जताई कि ईरान से जुड़े हालिया संघर्ष के कारण रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से अंतरराष्ट्रीय ध्यान कुछ हद तक हट गया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा सैन्य टकराव माना जाता है।

जेलेंस्की के अनुसार इस सप्ताह अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच होने वाली वार्ता का एक नया दौर प्रस्तावित था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों के कारण उसे स्थगित करना पड़ा। उनका कहना है कि यूक्रेन अब भी कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखना चाहता है।

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