अंतर्राष्ट्रीय

IranSecurity – सीमा पार घुसपैठ पर ईरान की बड़ी कार्रवाई, कई आतंकी ढेर

IranSecurity – ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए ‘जैश अल-अदल’ से जुड़े आतंकियों के एक समूह को खत्म कर दिया। यह कार्रवाई रास्क इलाके में की गई, जहां सुरक्षा एजेंसियों को सीमा पार से घुसपैठ की सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि यह समूह पाकिस्तान की तरफ से ईरान में दाखिल हुआ था। ऑपरेशन के दौरान कई आतंकियों के मारे जाने की खबर है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर ईरान और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद तनाव को सामने ला दिया है।

iran border operation against militants

घुसपैठ की सूचना पर तुरंत कार्रवाई

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिल गई थी। इसके बाद इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर इलाके में घेराबंदी कर ऑपरेशन शुरू किया गया। जैसे ही आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि हुई, सुरक्षा बलों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए उन्हें निशाना बनाया। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से किसी बड़े हमले की आशंका टल गई। रास्क क्षेत्र लंबे समय से सुरक्षा चुनौतियों के कारण संवेदनशील माना जाता है।

जैश अल-अदल को लेकर ईरान का रुख

ईरान इस संगठन को ‘जैश अल-जुल्म’ कहता है और इसे एक खतरनाक आतंकी गुट मानता है। यह समूह मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्वी ईरान में सक्रिय बताया जाता है और अक्सर सुरक्षा बलों तथा नागरिकों को निशाना बनाता रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कई बार आरोप लगाया है कि यह संगठन स्वतंत्र रूप से काम नहीं करता, बल्कि बाहरी समर्थन से संचालित होता है। हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अलग रही है।

कुलभूषण जाधव मामले से जुड़ा संदर्भ

इस संगठन का नाम भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले में भी सामने आया था। वर्ष 2016 में जाधव का ईरान के सरबाज क्षेत्र से अपहरण किया गया था। विभिन्न रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इसके पीछे यही आतंकी संगठन था, जिसने बाद में उन्हें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को सौंप दिया। फिलहाल जाधव पाकिस्तान की जेल में बंद हैं और यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है।

कूटनीतिक समीकरणों में उभरता विरोधाभास

यह पूरी घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है। वह ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की पहल कर रहा है। लेकिन दूसरी ओर, ईरान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि उसकी सीमा के पास सक्रिय आतंकी समूहों को पाकिस्तान की जमीन से समर्थन मिलता है। यही स्थिति दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को और गहरा करती है।

सीमा विवाद और परस्पर आरोप

ईरान और पाकिस्तान के बीच साझा सीमा लंबे समय से संवेदनशील रही है। दोनों देश एक-दूसरे पर सीमा पार आतंकवाद को लेकर आरोप लगाते रहे हैं। ईरान का कहना है कि जैश अल-अदल जैसे समूह उसके क्षेत्र में हमलों को अंजाम देते हैं और उन्हें पड़ोसी देश के सीमावर्ती इलाकों में पनाह मिलती है। वहीं पाकिस्तान भी पलटवार करते हुए ईरान पर आरोप लगाता है कि वह बलूच अलगाववादी संगठनों को शरण देता है, जो पाकिस्तान के अंदर हिंसक गतिविधियों में शामिल रहते हैं।

पहले भी बढ़ चुका है सैन्य तनाव

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच तनाव कई बार खुलकर सामने आया है। जनवरी 2024 में ईरान ने पाकिस्तान के भीतर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्रवाई की थी। इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत हुई और स्थिति को संभालने की कोशिश की गई। हालांकि ताजा घटना यह संकेत देती है कि सीमा पार सक्रिय संगठनों को लेकर अविश्वास अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.