IranUSConflict – परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता पर ईरान का आरोप, बढ़ा तनाव
IranUSConflict – अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दावा किया है कि तेहरान ने पहले कूटनीतिक समाधान की कोशिश की थी, लेकिन अमेरिका इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं था। उनके अनुसार ईरान ने परमाणु हथियारों के मुद्दे पर बातचीत का प्रस्ताव रखा था, जिसे अमेरिकी पक्ष ने स्वीकार नहीं किया। अरागची ने कहा कि यदि उस समय गंभीर वार्ता होती तो हालात शायद इस स्तर तक न पहुंचते।

ईरानी विदेश मंत्री ने बताया कि फरवरी के अंत में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बैठक हुई थी। उस बातचीत में ईरान ने परमाणु निरस्त्रीकरण जैसे संवेदनशील विषय पर चर्चा की पहल की थी। हालांकि उनके मुताबिक अमेरिकी प्रतिनिधियों ने इस विषय पर किसी तरह की बातचीत से दूरी बनाए रखी।
जिनेवा वार्ता और कूटनीतिक प्रयास
ईरान की ओर से उस बैठक में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा गया था जिसकी अगुवाई विदेश मंत्री अब्बास अरागची कर रहे थे। अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व स्टीव विटकॉफ के हाथों में था। इस बैठक को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की संभावित शुरुआत के रूप में देखा जा रहा था।
जिनेवा बैठक के बाद आगे की तकनीकी स्तर की बातचीत भी प्रस्तावित थी। दोनों देशों की तकनीकी टीमों के बीच वियना में 2 मार्च से वार्ता होने की योजना बनाई गई थी। लेकिन इससे पहले ही हालात तेजी से बिगड़ गए और सैन्य टकराव शुरू हो गया। इसके बाद कूटनीतिक प्रयासों की दिशा फिलहाल ठहर गई है।
पश्चिम एशिया संकट पर भारत की चिंता
इस बीच क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने भी कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता दिखाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात और उसके संभावित प्रभावों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में बढ़ती हिंसा, नागरिकों की मौत और असैन्य ढांचे को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने यह भी कहा कि इस संकट का असर व्यापक क्षेत्र पर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री ने भारत की ओर से शांति और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए सभी पक्षों से संवाद और कूटनीति के रास्ते अपनाने की अपील की।
भारतीय नागरिकों और ऊर्जा आपूर्ति पर ध्यान
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति को यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही ऊर्जा आपूर्ति और आवश्यक वस्तुओं के निर्बाध परिवहन को सुनिश्चित करना भी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने भी प्रधानमंत्री को मौजूदा हालात की जानकारी दी और क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों पर ईरान का दृष्टिकोण साझा किया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार दोनों नेताओं ने आगे भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई है ताकि स्थिति पर लगातार संवाद जारी रखा जा सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चिंता
वर्तमान संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और भारत के तेल आयात का भी बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
हाल ही में यह जानकारी सामने आई कि भारत की ओर आ रहे एक तेल टैंकर पर ईरानी बलों ने उस समय गोलीबारी की जब वह इस जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहा था। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा परिवहन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
क्षेत्रीय नेताओं से लगातार संपर्क
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने क्षेत्रीय देशों से लगातार संवाद बनाए रखा है। पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इज़राइल और कतर के नेताओं से भी बातचीत की है।
इन वार्ताओं में क्षेत्र में हो रहे हमलों और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की गई। साथ ही इन देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण पर भी चर्चा की गई। खाड़ी क्षेत्र और पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनमें हजारों लोग ईरान और इज़राइल में भी बसे हुए हैं। ऐसे में मौजूदा संकट को देखते हुए भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।



