MiddleEastCrisis – खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्रीय तनाव तेज
MiddleEastCrisis – ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। हालिया सैन्य घटनाक्रमों ने पहले से तनावग्रस्त क्षेत्र को और अस्थिर बना दिया है। इजरायल और अमेरिका की ओर से किए गए हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल से जुड़े ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र में कुछ रणनीतिकस्थानों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले किए। इस घटनाक्रम ने कई देशों को सतर्क कर दिया है और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी है।

चीन ने जताई कड़ी आपत्ति
खामेनेई की मौत पर चीन ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इसे ईरान की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन बताया। बीजिंग का कहना है कि किसी स्वतंत्र राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानकों के विपरीत है। चीन ने संकेत दिया कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर सकती है और इससे व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ती है। चीन पहले भी पश्चिम एशिया में संतुलित भूमिका निभाने की बात करता रहा है, लेकिन इस बार उसका बयान अपेक्षाकृत अधिक स्पष्ट और तीखा माना जा रहा है।
खाड़ी देशों में बढ़ी सतर्कता
ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद दुबई और अबू धाबी सहित कुछ प्रमुख स्थानों पर हमलों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वह अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। अधिकारियों ने इसे उकसावे की कार्रवाई बताते हुए क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा करार दिया। कई हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जबकि कुछ उड़ानों के कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और ऊर्जा आपूर्ति पर इसके संभावित असर को लेकर भी चिंताएं सामने आ रही हैं।
ईरान में अंतरिम नेतृत्व की व्यवस्था
खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सर्वोच्च नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे थे। अब अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को अंतरिम नेतृत्व परिषद में धार्मिक विधिवेत्ता सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह परिषद तब तक सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारियां संभालेगी, जब तक विशेषज्ञों की सभा स्थायी उत्तराधिकारी का चयन नहीं कर लेती। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में यह प्रक्रिया संवैधानिक ढांचे के तहत होती है, इसलिए अंतरिम व्यवस्था को स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और सामाजिक प्रभाव
अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद कई देशों में प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए, वहीं कई सरकारों ने संयम बरतने की अपील की है। भारत में भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के एक गांव का नाम चर्चा में आया, जहां स्थानीय लोग ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए शोक जता रहे हैं। हालांकि आधिकारिक स्तर पर शांति और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया जा रहा है।
भारत में उच्चस्तरीय बैठक
तेजी से बदलते हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी में कैबिनेट सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई है। बताया गया है कि विदेश और सुरक्षा एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट ली जाएगी। सरकार की प्राथमिकता क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और व्यापार पर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में यह ताजा संकट आने वाले दिनों में किस दिशा में जाएगा, यह कूटनीतिक प्रयासों और संबंधित देशों के रुख पर निर्भर करेगा। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इसी क्षेत्र पर टिकी हैं।



