MissileTest – उत्तर कोरिया ने समुद्र की ओर दागा प्रक्षेपास्त्र, बढ़ी क्षेत्रीय सतर्कता…
MissileTest – उत्तर कोरिया ने शनिवार को समुद्र की दिशा में एक प्रक्षेपास्त्र दागा, जिसकी पुष्टि दक्षिण कोरिया और जापान दोनों ने की है। शुरुआती आकलन में जापान ने आशंका जताई है कि यह बैलिस्टिक मिसाइल हो सकती है। इस परीक्षण के बाद क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं और पड़ोसी देशों ने हालात पर करीबी नजर बनाए रखी है।

दक्षिण कोरिया और जापान ने दी प्रक्षेपण की जानकारी
दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार यह मिसाइल उत्तर कोरिया के पूर्वी तट से समुद्र की ओर छोड़ी गई। फिलहाल सैन्य अधिकारियों ने इसके प्रकार या दूरी से संबंधित विस्तृत तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
उधर जापान के तट रक्षक बल ने भी इस प्रक्षेपण की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल समुद्र में गिरती हुई प्रतीत हुई। जापान के सार्वजनिक प्रसारक एनएचके ने रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से जानकारी दी कि यह प्रक्षेपास्त्र जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी ईईजेड के बाहर जाकर गिरा। इसके बावजूद क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
सैन्य अभ्यास के बीच हुआ परीक्षण
यह मिसाइल परीक्षण ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने हाल ही में संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किए हैं। दोनों देशों ने 9 मार्च से बड़े पैमाने पर यह सैन्य अभ्यास शुरू किया था, जो करीब पांच दिनों से जारी हैं।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि इन अभ्यासों का उद्देश्य केवल रक्षात्मक तैयारी को मजबूत करना है। उनके अनुसार इस तरह के संयुक्त अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने और संभावित खतरों के लिए सैन्य समन्वय को बेहतर करने के लिए आयोजित किए जाते हैं।
उत्तर कोरिया का लंबे समय से विरोध
उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है। प्योंगयांग का कहना है कि ऐसे युद्धाभ्यास उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं और इन्हें वह उकसावे की कार्रवाई मानता है।
पिछले वर्षों में भी कई बार ऐसा देखा गया है कि जब भी इस तरह के सैन्य अभ्यास होते हैं, तब उत्तर कोरिया मिसाइल परीक्षण या अन्य सैन्य गतिविधियों के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देता है। इसलिए ताजा प्रक्षेपास्त्र परीक्षण को भी इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंताएं
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की ओर से किए जाने वाले इस तरह के परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर डालते हैं। पूर्वी एशिया पहले से ही कई रणनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है और ऐसे घटनाक्रम से तनाव और बढ़ सकता है।
हालांकि इस बार मिसाइल के जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर गिरने की जानकारी सामने आई है, फिर भी जापान और दक्षिण कोरिया दोनों ने अपने सुरक्षा तंत्र को सतर्क बनाए रखा है। रक्षा एजेंसियां प्रक्षेपास्त्र की प्रकृति और उसकी उड़ान से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण कर रही हैं।
कूटनीतिक प्रयास भी जारी
इसी बीच क्षेत्रीय तनाव को कम करने और संवाद की संभावनाओं को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिशें भी चल रही हैं। गुरुवार को दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री ने वाशिंगटन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की।
इस बैठक के दौरान उत्तर कोरिया के साथ लंबे समय से रुके संवाद को दोबारा शुरू करने के रास्तों पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जरूरी है।
2019 से रुकी हुई बातचीत
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच वार्ता प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से ठप पड़ी हुई है। वर्ष 2019 के बाद से दोनों देशों के बीच औपचारिक स्तर पर कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद यदि कूटनीतिक संवाद फिर से शुरू होता है तो इससे पूर्वी एशिया में स्थिरता लाने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल सभी देशों की नजरें आने वाले दिनों में उत्तर कोरिया की गतिविधियों और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई हैं।



