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Pakistan Migration Crisis 2025: मुनीर के ‘ब्रेन गेन’ के दावे पर छिड़ा बवाल, कहां गायब हुई कंगाल पाकिस्तान की सबसे कीमती दौलत…

Pakistan Migration Crisis 2025: पाकिस्तान आज अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है, जहां गहराता आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता देश की नींव हिला रही है। भूख और महंगाई से जूझते इस देश में अब एक नया और डरावना ट्रेंड सामने आया है, जिसे ‘प्रतिभाओं का पलायन’ कहा जा रहा है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो पाकिस्तान (Economic Instability Effects) के चलते अपनी सबसे बड़ी ताकत यानी पेशेवर युवाओं को खो रहा है। यह संकट अब केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक पूरे समाज के बिखरने की दास्तां बयां कर रहा है, जहां हर शिक्षित व्यक्ति देश छोड़ने की फिराक में है।

Pakistan Migration Crisis 2025
Pakistan Migration Crisis 2025
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ब्यूरो ऑफ एमिग्रेशन की रिपोर्ट ने खोली सिस्टम की पोल

ब्यूरो ऑफ एमिग्रेशन एंड ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। पिछले 24 महीनों के भीतर पाकिस्तान ने 5,000 डॉक्टर, 11,000 इंजीनियर और 13,000 से अधिक अकाउंटेंट खो दिए हैं। जब किसी देश का (Professional Brain Drain) इस स्तर पर पहुंच जाए, तो वहां की संस्थागत व्यवस्था का ढहना निश्चित हो जाता है। यह रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि पाकिस्तान के पढ़े-लिखे तबके का अब अपनी सरकार और भविष्य की योजनाओं से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है, और वे किसी भी कीमत पर सुरक्षित भविष्य की तलाश में विदेश जा रहे हैं।

जनरल मुनीर का ‘ब्रेन गेन’ तर्क और जनता का आक्रोश

इन चुनौतीपूर्ण हालात के बीच सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने बड़े पैमाने पर हो रहे इस पलायन को “ब्रेन गेन” करार दिया था, जिसका अब जनता जमकर मजाक उड़ा रही है। आलोचकों का कहना है कि जब देश के (Military Leadership Statements) जमीनी हकीकत से इतने दूर हों, तो सुधार की उम्मीद बेमानी है। सोशल मीडिया पर लोग तंज कस रहे हैं कि काबिल लोगों का देश छोड़कर जाना भला किसी राष्ट्र के लिए फायदेमंद कैसे हो सकता है, जबकि पीछे सिर्फ बेरोजगारी और लाचारी ही बच रही है।

पूर्व सीनेटर मुस्तफा खोखर का सरकार पर तीखा प्रहार

पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखर ने इन आधिकारिक आंकड़ों को साझा करते हुए शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक मुल्क की (Political Reform Importance) की दिशा में कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक अर्थव्यवस्था का संभलना नामुमकिन है। खोखर ने यह भी उजागर किया कि पाकिस्तान दुनिया का चौथा सबसे बड़ा फ्रीलांसिंग हब है, लेकिन इंटरनेट शटडाउन और सरकारी पाबंदियों के कारण देश को अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है, जिससे लाखों युवाओं का रोजगार दांव पर लगा है।

पलायन के रजिस्ट्रेशन में आई रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 7.27 लाख से अधिक पाकिस्तानियों ने विदेशी रोजगार के लिए अपना पंजीकरण कराया था। लेकिन 2025 की तस्वीर और भी भयावह है, जहां नवंबर महीने तक ही (Overseas Employment Trends) के लिए लगभग 6.87 लाख लोग कतार में खड़े हो चुके हैं। यह केवल मजदूरी के लिए जाने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि इनमें उच्च शिक्षित वर्ग की संख्या पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ गई है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति किसी ‘साइलेंट इमरजेंसी’ से कम नहीं है, जहां देश का भविष्य ही सीमाओं के पार जा रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में मची भारी खलबली और नर्सों का पलायन

पलायन की इस आंधी ने पाकिस्तान के हेल्थकेयर सेक्टर को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2011 से 2024 के बीच नर्सों के देश छोड़ने की दर में 2,144 प्रतिशत का अकल्पनीय इजाफा हुआ है। अस्पतालों में (Healthcare System Crisis) अब इस कदर बढ़ गया है कि अनुभवी स्टाफ की भारी कमी महसूस की जा रही है। 2025 में भी यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे आम जनता को मिलने वाली बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।

हवाई अड्डों पर सख्ती और भीख मांगने के आरोपों की शर्मिंदगी

अपनी गिरती साख को बचाने के लिए शहबाज शरीफ सरकार ने अब हवाई अड्डों पर यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। वर्ष 2025 में अब तक 66,154 से अधिक लोगों को विदेश जाने से रोका गया है। वहीं दूसरी ओर, खाड़ी देशों से हजारों पाकिस्तानियों को वापस भेजा जा रहा है क्योंकि वे वहां (Illegal Immigration Issues) या भीख मांगने जैसी गतिविधियों में लिप्त पाए गए थे। यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और सामाजिक शर्मिंदगी का कारण बन रहा है।

अवसरहीनता की मार और खाली होती लैब का दर्द

इमरान खान की पार्टी पीटीआई से जुड़े साजिद सिकंदर अली ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि बिना रिसर्च फंडिंग और बिना इंडस्ट्री के प्रतिभाएं आखिर देश में कैसे रुकेंगी? आज पाकिस्तान में (PhD Unemployment Rate) भी चिंता का विषय है, जहां उच्च शिक्षित लोग खाली लैब्स और बंद दफ्तरों को देखकर निराश हो रहे हैं। उनका मानना है कि युवाओं को अपमान या पाबंदियों से नहीं, बल्कि अवसर देकर ही रोका जा सकता है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले कुछ वर्षों में पाकिस्तान केवल एक ऐसा भौगोलिक ढांचा रह जाएगा जिसमें उसकी मेधा और बुद्धिजीवी वर्ग का नामोनिशान नहीं होग

 

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