RussiaOilSanctions – रूसी तेल पर अमेरिकी छूट से यूक्रेन ने जताई कड़ी आपत्ति
RussiaOilSanctions – पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर के बीच अमेरिका के एक फैसले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रूस से जुड़े तेल प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने के अमेरिकी निर्णय पर यूक्रेन ने कड़ी नाराजगी जताई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का कहना है कि इस कदम से रूस पर बनाए गए आर्थिक दबाव में कमी आएगी और इससे चल रहे युद्ध को खत्म करने के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं।

पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मीडिया से बातचीत करते हुए जेलेंस्की ने कहा कि प्रतिबंधों में यह ढील रूस को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे युद्ध की परिस्थितियां और जटिल हो सकती हैं।
जेलेंस्की ने फैसले को बताया चिंताजनक
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा ऊर्जा निर्यात पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि तेल व्यापार से मिलने वाली आय बढ़ती है, तो इसका उपयोग सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
जेलेंस्की के अनुसार केवल एक नीति बदलाव से रूस को अरबों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस पर दबाव बनाना था ताकि युद्ध को समाप्त करने के लिए रास्ता निकले।
उनका कहना था कि यदि प्रतिबंधों में ढील दी जाती है तो उस रणनीति की प्रभावशीलता कम हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा निर्यात से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल हथियारों और सैन्य उपकरणों पर किया जा सकता है।
जी-7 देशों में भी मतभेद
अमेरिका के इस निर्णय पर जी-7 देशों के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि समूह के कई देशों ने इस फैसले को लेकर चिंता व्यक्त की है।
मर्ज़ के अनुसार वैश्विक ऊर्जा बाजार में इस समय कीमतों का दबाव जरूर है, लेकिन आपूर्ति की स्थिति उतनी गंभीर नहीं है कि इस तरह की छूट देना आवश्यक हो। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित संदेश जा सकता है।
वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत संतुलित प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि यदि यह छूट सीमित अवधि और विशेष परिस्थितियों तक ही सीमित रहती है, तो इसका प्रभाव सीमित रह सकता है।
अमेरिका ने क्यों लिया यह फैसला
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए लिया गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। रिपोर्टों के अनुसार कई जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना हुआ है।
इन परिस्थितियों में तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति ने कई देशों की आर्थिक चिंताओं को बढ़ा दिया है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय की सफाई
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि प्रतिबंधों में दी गई छूट सीमित और अस्थायी है। मंत्रालय के अनुसार इसका उद्देश्य उन रूसी तेल कार्गो को बाजार तक पहुंचने की अनुमति देना है जो पहले से समुद्री मार्गों में मौजूद हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम वैश्विक आपूर्ति में अचानक कमी आने से रोकने के लिए उठाया गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी कहा कि इस नीति से रूस को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना कम है क्योंकि छूट केवल सीमित परिस्थितियों के लिए लागू है।
विश्लेषकों का मानना है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में तनाव और उत्पादन में संभावित बाधाओं के कारण तेल बाजार अस्थिर बना हुआ है। ऐसे माहौल में ऊर्जा आपूर्ति और भू-राजनीतिक समीकरण दोनों ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं।



