ShahedDrones – ईरानी ड्रोन खतरे पर सहयोग को लेकर जेलेंस्की का बड़ा बयान
ShahedDrones – यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने संकेत दिया है कि कई देशों ने ईरानी शाहेद ड्रोन से निपटने के लिए यूक्रेन से तकनीकी और रणनीतिक सहयोग की मांग की है। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया और अमेरिका के कुछ साझेदार देश इस तरह के ड्रोन हमलों से बचाव के लिए यूक्रेन के अनुभव को उपयोगी मान रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की मदद यूक्रेन की अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्रभावित किए बिना ही संभव होगी।

खाड़ी देशों के नेताओं से सहयोग पर बातचीत
जेलेंस्की ने बुधवार देर रात दिए बयान में बताया कि हाल के दिनों में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत के नेताओं से बातचीत की है। इन चर्चाओं में मुख्य रूप से ड्रोन हमलों से बचाव के उपायों और संभावित सहयोग के तरीकों पर विचार किया गया।
उनका कहना था कि यूक्रेन ने पिछले कुछ वर्षों में ऐसे हमलों से निपटने का व्यापक अनुभव हासिल किया है, इसलिए कई देश इस क्षेत्र में उसकी विशेषज्ञता का लाभ लेना चाहते हैं। लेकिन किसी भी सहयोग का निर्णय लेते समय यूक्रेन की अपनी सुरक्षा प्राथमिकता बनी रहेगी।
रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन का बढ़ता उपयोग
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। रूस ने पिछले लगभग चार वर्षों में यूक्रेन के खिलाफ हजारों शाहेद ड्रोन का उपयोग किया है। इन हमलों ने कई बार यूक्रेनी शहरों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसी अनुभव के कारण यूक्रेन ने ड्रोन हमलों से निपटने की कई रणनीतियां विकसित की हैं। यही वजह है कि अब अन्य देश भी इस अनुभव को साझा करने में रुचि दिखा रहे हैं।
सहायता पर यूक्रेन की स्पष्ट शर्त
जेलेंस्की ने कहा कि यदि यूक्रेन किसी अन्य देश को इस तरह की सुरक्षा सहायता प्रदान करता है तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इससे उसकी अपनी रक्षा क्षमताओं पर कोई असर न पड़े। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इससे रूस के खिलाफ चल रहे संघर्ष में यूक्रेन की कूटनीतिक और सैन्य स्थिति मजबूत बनी रहे।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन उन देशों की मदद करने के लिए तैयार है जो उसके साथ खड़े रहे हैं और उसके संघर्ष को समझते हैं। लेकिन हर सहयोगी कदम को सावधानीपूर्वक परखा जाएगा।
ईरान संकट से वैश्विक ध्यान पर असर
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़ी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध से ध्यान कुछ हद तक हटा दिया है। उनके अनुसार यह संघर्ष यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच प्रस्तावित वार्ता के अगले दौर को फिलहाल स्थगित करना पड़ा है। इसका एक कारण क्षेत्रीय सुरक्षा हालात और वैश्विक प्राथमिकताओं में आए बदलाव को भी माना जा रहा है।
शांति वार्ता पर अनिश्चितता बरकरार
पश्चिमी देशों की सरकारों और स्वतंत्र विश्लेषकों का कहना है कि इस युद्ध में अब तक बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बावजूद अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है जिससे यह लगे कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है।
जेलेंस्की के अनुसार फिलहाल त्रिपक्षीय कूटनीतिक बैठक के लिए आवश्यक परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति स्थिर होगी, वार्ता प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की कोशिश की जाएगी।
खाड़ी देशों की अमेरिका से नाराजगी
दूसरी ओर, फारस की खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों में अमेरिका के प्रति असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों का मानना है कि अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी।
सूत्रों के मुताबिक इन देशों को यह भी चिंता है कि संभावित जवाबी हमलों से निपटने के लिए उन्हें पर्याप्त समय और तैयारी का अवसर नहीं मिला। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से कई खाड़ी देशों में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
बदलते सुरक्षा समीकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग ने आधुनिक युद्ध की प्रकृति को काफी बदल दिया है। कम लागत और दूर से संचालन की क्षमता के कारण ये हथियार कई देशों के लिए नई चुनौती बनकर उभरे हैं।
इसी वजह से अब कई देश ऐसे हमलों से बचाव के लिए आपसी सहयोग और तकनीकी साझेदारी पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। आने वाले समय में यह सहयोग वैश्विक सुरक्षा रणनीतियों का अहम हिस्सा बन सकता है।