TrumpDiplomacy – वैश्विक संकटों पर दामाद और दोस्त को बड़ी जिम्मेदारी
TrumpDiplomacy – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध और ईरान के साथ बढ़ते तनाव जैसे दो बड़े अंतरराष्ट्रीय संकटों को संभालने की जिम्मेदारी अपने करीबी सहयोगियों को सौंपी है। ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुश्नर और पुराने मित्र स्टीव विटकॉफ को विशेष भूमिका देते हुए कूटनीतिक प्रयासों की अगुवाई करने का जिम्मा दिया है। हाल ही में दोनों ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में कई अहम बैठकों में हिस्सा लिया, जहां कुछ ही घंटों के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत की गई।

जिनेवा में गहन कूटनीतिक गतिविधियां
जिनेवा में उनका कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहा। सबसे पहले उन्होंने ओमान के राजदूत के निवास पर ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संभावित समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाना और किसी बड़े सैन्य टकराव की आशंका को कम करना बताया गया। इसके तुरंत बाद दोनों इंटरकॉन्टिनेंटल होटल पहुंचे, जहां यूक्रेनी प्रतिनिधियों से चर्चा हुई। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके समाधान की कोशिशें जारी हैं।
इसी क्रम में वे फोर सीजन्स होटल भी गए, जहां अलग-अलग मंजिलों पर रूस और यूक्रेन के दूतों से अलग-अलग दौर की बातचीत हुई। दिन भर की बैठकों के बाद वे दोबारा ओमान के राजदूत के आवास पहुंचे और फिर अमेरिका लौटने की तैयारी की। इन बैठकों को लेकर आधिकारिक स्तर पर सीमित जानकारी साझा की गई है, लेकिन इन्हें उच्चस्तरीय कूटनीतिक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
गाजा संघर्ष में भी सक्रिय भूमिका
कुश्नर और विटकॉफ की भूमिका केवल यूरोप या ईरान तक सीमित नहीं है। हाल ही में उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भी भाग लिया था। यह मंच गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच हुए युद्धविराम समझौते के तहत स्थापित किया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य संघर्षविराम की शर्तों के पालन की निगरानी और आगे की स्थिरता सुनिश्चित करना है।
ट्रंप की कार्यशैली पर चर्चा
ट्रंप की यह रणनीति पारंपरिक अमेरिकी कूटनीतिक ढांचे से अलग मानी जा रही है। आमतौर पर विदेश नीति के संवेदनशील मुद्दों को विदेश विभाग और अनुभवी राजनयिकों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है, लेकिन ट्रंप ने अपने भरोसेमंद सहयोगियों पर सीधा दांव लगाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप निजी भरोसे को प्राथमिकता देते हैं और महत्वपूर्ण मामलों में सीमित लेकिन विश्वसनीय टीम के साथ काम करना पसंद करते हैं।
विशेषज्ञों की आशंकाएं
कुछ अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यूक्रेन युद्ध, ईरान परमाणु मुद्दा और गाजा संघर्ष—तीनों ही अत्यंत जटिल और बहुस्तरीय विषय हैं, जिनके लिए विस्तृत तैयारी और दीर्घकालिक वार्ता अनुभव की आवश्यकता होती है। ‘कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ से जुड़े वरिष्ठ फेलो आरोन डेविड मिलर ने टिप्पणी की कि इतनी बड़ी वार्ताओं को एक साथ संभालना बेहद कठिन कार्य है और हर मुद्दा अपने आप में विस्तृत और संवेदनशील है।
व्हाइट हाउस का पक्ष
वहीं प्रशासन का कहना है कि कुश्नर और विटकॉफ का अनुभव और व्यावसायिक पृष्ठभूमि उन्हें वैश्विक नेताओं से बातचीत में मदद करती है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों को नियमित रूप से खुफिया एजेंसियों से जानकारी मिलती है और वे राष्ट्रपति से सीधे संवाद में रहते हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया तेज होती है।
व्यावसायिक हितों पर उठते सवाल
इन नियुक्तियों के साथ संभावित हितों के टकराव का मुद्दा भी उठाया गया है। कुश्नर की निवेश फर्म ‘एफिनिटी पार्टनर्स’ मध्य पूर्व के फंड्स से जुड़ी है, जबकि विटकॉफ की कारोबारी गतिविधियां भी क्षेत्रीय निवेश और वित्तीय सौदों से संबंधित रही हैं। कुछ अमेरिकी सांसदों ने चिंता जताई है कि वे सीनेट की औपचारिक मंजूरी या प्रत्यक्ष सरकारी निगरानी के दायरे में नहीं आते।
यूक्रेन की सकारात्मक प्रतिक्रिया
यूक्रेन ने इन दोनों की भागीदारी का स्वागत किया है। कीव का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप से उनका सीधा संपर्क वार्ता प्रक्रिया को गति दे सकता है। यूक्रेनी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मार्च की शुरुआत में रूस के साथ संभावित त्रिपक्षीय चर्चा की तैयारी की जा रही है। हालांकि, कुछ पूर्व राजनयिकों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच लाभकारी हो सकती है, लेकिन जमीनी स्तर की जटिलताओं की गहरी समझ भी उतनी ही जरूरी है।



