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US Venezuela Oil Diplomacy: फिर बदलेगा दुनिया का नक्शा, ट्रंप के कड़े फरमान ने रूस और चीन की बढ़ाई धड़कनें…

Focus Keyword: US Venezuela Oil Diplomacy: वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नाटकीय गिरफ्तारी के बाद से लातिन अमेरिकी राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने अब वेनेजुएला को लेकर एक ऐसा सख्त आदेश जारी किया है, जो न केवल आर्थिक बल्कि (Geopolitical Tension) के लिहाज से भी काफी संवेदनशील माना जा रहा है। अमेरिका के इस नए फरमान ने रूस और चीन जैसे महाशक्तियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

Focus Keyword US Venezuela Oil Diplomacy
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चार शक्तिशाली देशों से नाता तोड़ने की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने वेनेजुएला की अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिगेज को स्पष्ट संदेश दिया है कि उन्हें अपने पुराने सहयोगियों से दूरी बनानी होगी। अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए (International Relations) के पुराने ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दे। इन देशों की सूची में भारत का भरोसेमंद दोस्त रूस भी शामिल है, जिसके साथ वेनेजुएला के दशकों पुराने सामरिक संबंध रहे हैं। अमेरिका की यह मांग अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा उलटफेर साबित हो सकती है।

तेल के खेल में अमेरिका की बादशाहत की शर्त

वेनेजुएला को अपनी जर्जर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तेल उत्पादन बढ़ाने की सख्त जरूरत है, लेकिन इसके लिए अमेरिका ने कड़ी शर्तें रख दी हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वेनेजुएला को अपने भारी कच्चे तेल की बिक्री में अमेरिका को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि (Crude Oil Production) को बढ़ाने की अनुमति तभी दी जाएगी जब वेनेजुएला रूस, चीन, ईरान और क्यूबा जैसे देशों से अपने आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को पूरी तरह खत्म कर देगा। यह शर्त सीधे तौर पर वेनेजुएला की संप्रभुता और उसकी भविष्य की दिशा को चुनौती देती नजर आती है।

चीन और रूस के प्रभाव को खत्म करने की बड़ी साजिश

वेनेजुएला लंबे समय से अपनी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बीजिंग और मॉस्को की ओर देखता रहा है। ह्यूगो शावेज और निकोलस मादुरो के दौर में इन देशों ने वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश किया है। अब अमेरिका चाहता है कि इन देशों को वेनेजुएला के बाजार से (Economic Exclusion) का सामना करना पड़े और वे पूरी तरह बाहर हो जाएं। यदि वेनेजुएला इन शर्तों को मानता है, तो यह दक्षिण अमेरिका में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा, जो वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल सकता है।

निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और न्यूयॉर्क का सफर

यह पूरा घटनाक्रम उस समय तेज हुआ जब वेनेजुएला के ताकतवर नेता निकोलस मादुरो को अमेरिकी विशेष बलों ने एक गुप्त अभियान के तहत गिरफ्तार कर लिया। उन्हें वेनेजुएला से सीधे न्यूयॉर्क ले जाया गया है, जहां उन पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। मादुरो की सत्ता से विदाई के बाद (Interim Government) की बागडोर डेल्सी रोड्रिगेज के हाथों में है, जिन्हें अब वाशिंगटन के कड़े निर्देशों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। अमेरिकी खुफिया विभाग की इस कार्रवाई ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है।

करोड़ों डॉलर के तेल सौदे का पूरा सच

मंगलवार की शाम ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि वेनेजुएला आने वाले समय में अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति करेगा। वर्तमान बाजार की कीमतों के हिसाब से इस सौदे की कीमत लगभग 2.8 अरब डॉलर आंकी गई है। ट्रंप का मानना है कि (Energy Security) को मजबूत करने के लिए वेनेजुएला का तेल अमेरिका के लिए अनिवार्य है। इस बिक्री से होने वाली आय का उपयोग दोनों देशों के हितों के लिए करने की बात कही गई है, लेकिन इसके पीछे की असली मंशा वेनेजुएला के खजाने पर नियंत्रण पाना भी हो सकती है।

अमेरिकी तेल कंपनियों के निवेश का नया रास्ता

अगले सप्ताह अमेरिकी प्रशासन की ओर से तेल कंपनियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने वाली है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों में अमेरिकी निवेश को फिर से शुरू करना है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि (Global Oil Market) में वेनेजुएला की वापसी पूरी तरह से अमेरिकी शर्तों और तकनीकों के आधार पर हो। अगर अमेरिकी कंपनियां वहां फिर से सक्रिय होती हैं, तो वेनेजुएला की पूरी तेल नीति वाशिंगटन के नियंत्रण में आ जाएगी, जिससे दूसरे देशों का हस्तक्षेप नाममात्र रह जाएगा।

कब्जे की मंशा नहीं पर नियंत्रण की पूरी तैयारी

वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया के सामने बार-बार यह दोहराया है कि अमेरिका का मकसद वेनेजुएला पर भौतिक रूप से कब्जा करना नहीं है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों से यह साफ झलकता है कि वह देश के आर्थिक भविष्य को अपने तरीके से निर्देशित करना चाहते हैं। वेनेजुएला की (Foreign Policy Revision) के बिना उसे आर्थिक मदद मिलना नामुमकिन लग रहा है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश के लिए यह एक ऐसा चौराहा है, जहां उसे अपने पुराने दोस्तों और नई आर्थिक संभावनाओं के बीच किसी एक को चुनना होगा।

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