US Sanctions on Muslim Brotherhood: मुस्लिम ब्रदरहुड के ठिकानों पर अमेरिका का सर्जिकल स्ट्राइक, अब आतंकवादियों की खैर नहीं
US Sanctions on Muslim Brotherhood: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी वादे को हकीकत में बदलते हुए ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की तीन प्रमुख मध्य पूर्वी शाखाओं पर कड़ा प्रहार किया है। मंगलवार को वॉशिंगटन से जारी एक आदेश ने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसमें लेबनान, जॉर्डन और मिस्र की शाखाओं को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इस (Middle East geopolitical tension) के बीच लिए गए फैसले का सीधा असर अमेरिका के पुराने सहयोगियों, जैसे कतर और तुर्की के साथ संबंधों पर पड़ना तय माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी हितों को नुकसान पहुँचाने वाली किसी भी संस्था को अब बख्शा नहीं जाएगा।

लेबनानी शाखा को मिली सबसे खतरनाक रेटिंग
अमेरिकी विदेश विभाग ने मुस्लिम ब्रदरहुड की लेबनानी इकाई को ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ की सबसे गंभीर श्रेणी में डाल दिया है। इस कड़े वर्गीकरण के लागू होने के बाद अब इस समूह को किसी भी प्रकार की वित्तीय या भौतिक मदद देना एक संघीय अपराध माना जाएगा। (Foreign terrorist organization designation) की यह कार्रवाई दर्शाती है कि अमेरिका इन समूहों को अपने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सक्रिय और बड़ा खतरा मान रहा है। इस फैसले के बाद लेबनान में सक्रिय इन गुटों की वैश्विक फंडिंग और संसाधनों पर पूरी तरह से ताला लग जाने की संभावना है।
हमास के मददगारों की अब शामत आई
जॉर्डन और मिस्र की शाखाओं पर कार्रवाई का मुख्य आधार उनका हमास के साथ कथित जुड़ाव बताया गया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इन दोनों इकाइयों को वैश्विक आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल कर लिया है, क्योंकि उन पर हमास को रसद और अन्य सहायता प्रदान करने के गंभीर आरोप हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने संबोधन में कहा कि (Combating global terrorism financing) के तहत यह तो बस एक शुरुआत है। अमेरिका अब इन समूहों को उन सभी संसाधनों से वंचित कर देगा जिनका उपयोग वे हिंसा और अस्थिरता फैलाने के लिए करते आए हैं।
हिंसा और अस्थिरता के खिलाफ निर्णायक लड़ाई
मार्को रुबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को पिछले वर्ष ही राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा एक विशेष कार्यकारी आदेश के तहत इन समूहों की नकेल कसने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ये संगठन भले ही सार्वजनिक रूप से शांति की बात करें, लेकिन पर्दे के पीछे वे (Regional instability in Middle East) को बढ़ावा देने वाले अभियानों में सीधे तौर पर शामिल हैं। हालांकि, मुस्लिम ब्रदरहुड के नेताओं ने बार-बार दावा किया है कि उन्होंने हिंसा का त्याग कर दिया है, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियां उनके इन दावों को सिरे से खारिज कर रही हैं।
7 अक्टूबर के हमले और रॉकेट दागने का कनेक्शन
राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकारी आदेश में उन विशिष्ट घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है जिन्होंने इस प्रतिबंध की नींव रखी। आदेश में दर्ज है कि लेबनानी गुट के एक हिस्से ने 7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले के बाद जवाबी कार्रवाई में रॉकेट दागे थे। (Israel Gaza war escalation) के पीछे इन समूहों की भूमिका को अमेरिका ने बहुत गंभीरता से लिया है। इसके अलावा, जॉर्डन स्थित गुट के नेताओं द्वारा हमास के लड़ाकों को खुले तौर पर समर्थन देने की बात भी इस कड़े फैसले का एक बड़ा कारण बनी है।
1928 से अब तक: मुस्लिम ब्रदरहुड का सफर
मुस्लिम ब्रदरहुड एक पुराना संगठन है जिसकी स्थापना 1928 में मिस्र में एक धार्मिक और राजनीतिक आंदोलन के रूप में हुई थी। लेकिन समय के साथ इसकी विचारधारा और गतिविधियों के कारण कई देशों ने इस पर पाबंदियां लगाईं। साल 2013 में खुद मिस्र ने (History of Muslim Brotherhood) को अपराधी घोषित करते हुए इस पर बैन लगा दिया था। इसी साल अप्रैल में जॉर्डन ने भी इस समूह पर व्यापक प्रतिबंधों की घोषणा की थी, जिससे यह साफ हो गया था कि अरब जगत के भीतर ही इस संगठन के प्रति विरोध के स्वर बहुत गहरे हैं।
अमेरिका के राज्यों में भी छिड़ी पाबंदी की मुहिम
संघीय सरकार के इस फैसले से पहले ही अमेरिका के भीतर इन समूहों के खिलाफ माहौल बनना शुरू हो गया था। रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व वाली फ्लोरिडा और टेक्सास जैसी राज्य सरकारों ने पहले ही इस समूह को अपने अधिकार क्षेत्र में आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था। (State level terror designations) की इस बढ़ती लहर ने जो बिडेन प्रशासन के दौरान भी दबाव बनाए रखा था, लेकिन ट्रंप के आते ही इसे राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बना दिया गया। अब अमेरिका के भीतर इन संगठनों से जुड़े किसी भी व्यक्ति या फंड पर कड़ी कानूनी नजर रखी जा रही है।
सहयोगी देशों के साथ बिगड़ सकते हैं समीकरण
ट्रंप के इस कदम ने कतर और तुर्की जैसे देशों को एक असहज स्थिति में डाल दिया है, क्योंकि इन देशों के मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ ऐतिहासिक रूप से सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। अमेरिका की यह (US foreign policy shifts) कूटनीतिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यह उसके सहयोगियों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगी। ट्रंप प्रशासन का संदेश साफ है कि आतंकवाद के मुद्दे पर कोई ‘ग्रे एरिया’ नहीं होगा; जो अमेरिका के दुश्मनों का दोस्त है, वह अमेरिका का सहयोगी नहीं रह सकता।