Javelin – रुमेश पथिरागे ने नीरज चोपड़ा को पछाड़ रचा इतिहास, जानिए उनकी कहानी
Javelin– कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुष जैवलिन थ्रो स्पर्धा में श्रीलंका के युवा एथलीट रुमेश पथिरागे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। उन्होंने 89.75 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर भारत के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा समेत कई दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के प्रयास के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि भारत के यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता।

एक वैध थ्रो ने बदल दी तस्वीर
मुकाबले के दौरान तेज हवाओं ने खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां पैदा कर दी थीं। इसके बावजूद रुमेश पथिरागे ने अपने एकमात्र वैध प्रयास में 89.75 मीटर का शानदार थ्रो किया, जो स्वर्ण पदक जीतने के लिए पर्याप्त साबित हुआ। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने मौजूदा विश्व चैंपियन, ओलंपिक चैंपियन और कई अनुभवी जैवलिन खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर प्रतियोगिता का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया।
क्रिकेट से शुरू हुआ खेल का सफर
21 मार्च 2003 को श्रीलंका के कलूतारा में जन्मे रुमेश पथिरागे का शुरुआती खेल जीवन क्रिकेट से जुड़ा रहा है। उन्होंने कम उम्र में सेंट पीटर्स कॉलेज, कोलंबो की ओर से क्रिकेट खेलना शुरू किया था। वह मीडियम पेस गेंदबाज थे और अंडर-18 स्तर पर उनकी गेंद की रफ्तार 134 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई थी। यही वजह है कि उन्हें श्रीलंका के उभरते तेज गेंदबाजों में भी गिना जाता था।
पिता और कोच ने दिखाई नई राह
रुमेश के पिता स्वयं डिस्कस और शॉट पुट प्रतियोगिताओं से जुड़े रहे हैं। उनकी सलाह पर रुमेश ने पहले डिस्कस थ्रो का अभ्यास शुरू किया और बाद में वर्ष 2017 में जैवलिन थ्रो की ओर कदम बढ़ाया। इस बदलाव में उनके कोच टोनी प्रसन्ना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एक पुराने इंटरव्यू में रुमेश ने कहा था कि उनके कोच ने केवल तकनीक ही नहीं सिखाई, बल्कि खेल के साथ जीवन के मूल्यों को भी समझाया। उनके अनुसार, मजबूत बुनियाद ही बड़े परिणामों की सबसे अहम कुंजी होती है।
लगातार प्रदर्शन ने दिलाई अलग पहचान
रुमेश पथिरागे की सबसे बड़ी ताकत उनकी निरंतरता मानी जाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2025 के सीजन में उन्होंने 13 बार 82 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंका। यही स्थिर प्रदर्शन उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सुधार, नियमित अभ्यास और मानसिक मजबूती ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभरने में मदद की है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक विजेता
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की जैवलिन स्पर्धा में रुमेश पथिरागे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। भारत के नीरज चोपड़ा 85.83 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर कांस्य पदक अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता के बाद रुमेश पथिरागे का नाम अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स जगत में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।