Anti Naxal Operation Jharkhand: झारखंड में नक्सलियों के विरुद्ध ऑपरेशन मेधाहातू तेज, अब मिसिर बेसरा निशाने पर
Anti Naxal Operation Jharkhand: झारखंड के जंगलों में भाकपा माओवादियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का शिकंजा कसता जा रहा है। ऑपरेशन मेधाहातू के तहत मिली हालिया सफलताओं ने संगठन की कमर तोड़ दी है, जिसमें पतिराम मांझी और अनमोल जैसे 17 कुख्यात नक्सली ढेर किए जा चुके हैं। अब सुरक्षाबलों का मुख्य लक्ष्य (Strategic Defense) को भेदते हुए एक करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को पकड़ना है। मिसिर बेसरा फिलहाल जराइकेला के दुर्गम इलाकों में शरण लिए हुए है, जहां सुरक्षाबलों ने चारों तरफ से घेराबंदी कर दी है ताकि उसे भागने का कोई रास्ता न मिल सके।

विस्फोटक विशेषज्ञ टेक विश्वनाथ और नीलिमा की सुरक्षा
मिसिर बेसरा की सुरक्षा की जिम्मेदारी तेलगू दंपति टेक विश्वनाथ उर्फ पुसुनूहरि नाराहरि और उसकी पत्नी नीलिमा के कंधों पर है। टेक विश्वनाथ को माओवादी संगठन का सबसे बड़ा (Explosive Expert) माना जाता है, जिसने बेसरा के कैंप के चारों ओर आईईडी का जाल बिछा रखा है। इसी सुरक्षा घेरे की वजह से पूर्व में जब भी सुरक्षाबलों ने इस इलाके में प्रवेश करने की कोशिश की, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस आईईडी नेटवर्क की चपेट में आकर कई बार निर्दोष ग्रामीण भी अपनी जान गंवा चुके हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व में भारी फेरबदल की कोशिश
संगठन के भीतर वर्तमान में नेतृत्व का संकट गहरा गया है क्योंकि हाल के ऑपरेशनों में कई शीर्ष कमांडर मारे गए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मारे गए नक्सली अनमोल को जल्द ही सीसी मेंबर के रूप में (Organizational Promotion) मिलने वाली थी, लेकिन सुरक्षाबलों ने उसकी योजना विफल कर दी। अब मिसिर बेसरा के साथ मौजूद विस्फोटक विशेषज्ञ टेक विश्वनाथ को ही केंद्रीय कमेटी में शामिल करने की तैयारी चल रही है। झारखंड पुलिस के अनुसार, अब राज्य में केवल दो ही तेलगू नक्सली सक्रिय बचे हैं, जो पहले संगठन में बहुत प्रभावी भूमिका निभाते थे।
ओडिशा सीमा पर कड़ी चौकसी और घेराबंदी
सुरक्षाबलों की इस बार की रणनीति पहले से काफी अलग और प्रभावी है, क्योंकि इसमें अंतरराज्यीय समन्वय पर जोर दिया गया है। पहले मुठभेड़ होने पर नक्सली दस्ते आसानी से ओडिशा की सीमा में घुस जाते थे, लेकिन अब (Border Security Management) को इतना मजबूत कर दिया गया है कि नक्सलियों का भागना नामुमकिन है। ओडिशा पुलिस ने भी झारखंड से सटे इलाकों में मोर्चा संभाल लिया है और लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। इस संयुक्त कार्रवाई के कारण सारंडा के जंगलों में घिरे नक्सली अब पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं।
सुरक्षा कैंपों का जाल और रसद की घेराबंदी
जंगलों के भीतर नक्सलियों के प्रभाव को खत्म करने के लिए पिछले दो वर्षों में सुरक्षाबलों ने अभूतपूर्व कार्य किया है। वर्ष 2011 के ऑपरेशन एनाकोंडा के बाद से सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों में (Tactical Force Deployment) के तहत अब तक कुल 90 कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। हाल ही में 25 नए कैंपों की स्थापना ने सुरक्षाबलों को नक्सलियों के कोर एरिया तक सीधी पहुंच प्रदान की है। इन कैंपों के माध्यम से नक्सलियों की सप्लाई लाइन काट दी गई है, जिससे वे जंगलों में दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं।
पतिराम मांझी के शव का इंतजार और ग्रामीणों की भावनाएं
एक करोड़ के इनामी नक्सली पतिराम मांझी उर्फ अनल की मौत के बाद उसके पैतृक गांव झरहा में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीण और परिजन उसके शव के अंतिम दर्शन के लिए बेताब हैं और चाहते हैं कि (Traditional Funeral Rites) गांव में ही संपन्न हों। पतिराम बहुत कम उम्र में संगठन से जुड़ा था और सालों तक परिवार से दूर रहा। उसकी पत्नी श्यामली देवी ने अकेले ही संघर्ष कर अपनी दो बेटियों का विवाह किया। ग्रामीणों के बीच अनल की मौत एक अध्याय का अंत मानी जा रही है, जो विकास के रास्ते में बाधक बना हुआ था।



