Hazaribagh Murder Case – रूपेश पांडेय हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद की हुई सजा
Hazaribagh Murder Case – हजारीबाग के बहुचर्चित रूपेश पांडेय हत्याकांड में चार साल बाद न्यायिक प्रक्रिया अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने इस मामले में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला गुरुवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में सुनाया गया। अदालत ने दोषियों पर दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया गया पेश
सजा सुनाए जाने के समय तीनों दोषी अभियुक्त जेल में बंद थे, जिन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है, उनमें मो. असलम अंसारी उर्फ असलम उर्फ पप्पू मियां, मो. कैफ और मो. गुरफान शामिल हैं। अदालत इससे पहले दो फरवरी को तीनों को हत्या और आपराधिक साजिश समेत गंभीर धाराओं में दोषी करार दे चुकी थी।
सीबीआई जांच और गवाहों की अहम भूमिका
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से वरीय लोक अभियोजक प्रियांशु सिंह ने अदालत के समक्ष कुल 15 गवाहों को प्रस्तुत किया। जांच एजेंसी ने घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर अपना पक्ष मजबूत तरीके से रखा। अदालत ने इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए दोष सिद्ध माना।
हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई को सौंपी गई थी जांच
इस हत्याकांड की जांच शुरू में स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही थी, लेकिन पीड़ित परिवार की असंतुष्टि के बाद मामला झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा। रूपेश पांडेय की मां उर्मिला पांडेय ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामले की गंभीरता और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत ने दो सितंबर 2022 को जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने बरही थाना की प्राथमिकी को टेकओवर कर कांड संख्या 1/2024 के तहत जांच आगे बढ़ाई और आरोपपत्र दाखिल किया।
मुख्य आरोपी के बरी होने पर परिवार की नाराजगी
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए रूपेश पांडेय के पिता सिकंदर पांडेय ने तीन दोषियों को मिली सजा पर संतोष जताया, लेकिन मुख्य आरोपी इश्तेखार मियां के बरी होने पर गहरी नाराजगी भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इश्तेखार को सजा दिलाने के लिए वे उच्च न्यायालय का रुख करेंगे। उनका आरोप है कि घटना के बाद से ही इश्तेखार फरार है और न्याय की लड़ाई अभी पूरी नहीं हुई है।
सरस्वती विसर्जन जुलूस के दौरान हुई थी हत्या
अभियोजन पक्ष के अनुसार, छह फरवरी 2022 की शाम लगभग पांच बजे रूपेश पांडेय अपने चाचा के साथ बरही में सरस्वती प्रतिमा विसर्जन जुलूस देखने गया था। इसी दौरान जुलूस में शामिल उन्मादी भीड़ ने उस पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया था। इस मामले में बरही थाने में कुल 27 आरोपियों के खिलाफ कांड संख्या 59/2022 दर्ज की गई थी, जिनमें से कुछ को शुरुआती दौर में गिरफ्तार किया गया था।
चार साल बाद आया फैसला, परिवार को मिला आंशिक न्याय
लंबी कानूनी प्रक्रिया, गवाहों की पेशी और विस्तृत जांच के बाद अदालत ने इस हत्याकांड में दोषियों को सजा सुनाई। हालांकि, पीड़ित परिवार के लिए यह न्याय अधूरा है, क्योंकि वे मुख्य आरोपी के खिलाफ अब भी कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कह रहे हैं। यह फैसला राज्य में कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया पर एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।



