झारखण्ड

Ranchi Lalpur Murder Case: मामूली विवाद और फिर कार से बेरहमी से कुचलकर की हत्या, इंसाफ के लिए गूंजा गढ़वा

Ranchi Lalpur Murder Case: झारखंड की राजधानी रांची का पॉश इलाका लालपुर रविवार की रात चीखों और खून के धब्बों से दहल उठा। मामूली कहासुनी ने ऐसा हिंसक रूप अख्तियार किया कि गढ़वा के 25 वर्षीय होनहार युवक अंकित कुमार सिंह को अपनी जान गंवानी पड़ी। (Criminal brutality) की इस वारदात ने एक बार फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था और बेलगाम होते युवकों के हौसलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Ranchi Lalpur Murder Case
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मून डिस्को बार में उपजा विवाद बना मौत का सबब

घटना की जड़ें लालपुर चौक के पास स्थित ‘मून डिस्को बार’ से जुड़ी हैं। मृतक के मामा सत्यप्रकाश सिंह के अनुसार, वे अंकित और उसके दोस्तों के साथ वहां खाना खाने गए थे। वहां मौजूद युवकों के एक अन्य समूह के साथ (Verbal altercation) शुरू हुई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज में बदल गई। किसी को अंदाजा नहीं था कि खाने की मेज से शुरू हुआ यह झगड़ा सड़क पर कत्ल की साजिश बन जाएगा।

साजिश के तहत घेराबंदी और फिर जानलेवा हमला

जैसे ही अंकित और उसके साथी बार से बाहर निकले, आरोपियों ने उन्हें घेर लिया। सत्यप्रकाश सिंह ने आरोप लगाया है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं बल्कि (Premeditated murder conspiracy) थी। पलामू के लेस्लीगंज निवासी रमनदीप सिंह, रोशन गुप्ता, अंशुल और विक्की खान सहित अन्य युवकों ने पहले अंकित की बेरहमी से पिटाई की और फिर भागने के बजाय उसे जान से मारने की नीयत से उस पर कार चढ़ा दी।

चश्मदीद गवाहों ने बयां किया खौफनाक मंजर

अंकित के दोस्त अर्णव उर्फ सेजल ने इस पूरी वारदात को अपनी आंखों से देखा और हमलावरों की पहचान की है। घटना के समय (Eye witness testimony) के अनुसार, आरोपी नशे और गुस्से में इस कदर चूर थे कि उन्होंने अंकित के साथ-साथ उसके मामा और दोस्त आकाश को भी कार से टक्कर मारकर जख्मी कर दिया। अफरा-तफरी का फायदा उठाकर सभी आरोपी अपनी तेज रफ्तार कार के साथ मौके से फरार हो गए।

अस्पताल दर अस्पताल भटकते रहे परिजन, पर नहीं बची जान

घायल अंकित को लहूलुहान हालत में पहले रांची सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रिम्स रेफर कर दिया गया। रिम्स में (Emergency medical failure) की कड़वी सच्चाई सामने आई जब डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सदमे में डूबे परिजन यकीन नहीं कर पा रहे थे, इसलिए वे उसे हेल्थ प्वाइंट हॉस्पिटल भी ले गए, लेकिन वहां भी मौत की ही पुष्टि हुई।

पुलिसिया कार्रवाई और जीरो एफआईआर का सहारा

मामले की गंभीरता को देखते हुए मृतक के मामा ने रांची के बजाय अपने गृह जिले गढ़वा में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज कराई है। गढ़वा के थाना प्रभारी सुनील तिवारी ने बताया कि (Legal police procedure) का पालन करते हुए केस को जांच के लिए लालपुर थाना स्थानांतरित कर दिया गया है। पुलिस अब उन सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है, जो आरोपियों की कार और उनकी पहचान को पुख्ता कर सकें।

परिवार में मातम और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

मझिआंव के हरिगांवा का रहने वाला अंकित अपने परिवार का लाडला था। उसकी मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, वहां सन्नाटा पसर गया। परिजनों ने (Public demand for justice) करते हुए प्रशासन से मांग की है कि नामजद आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए। विक्की खान, रमनदीप और उनके साथियों की तलाश में पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

झारखंड में कानून व्यवस्था पर उठते बड़े सवाल

इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि राजधानी के भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी अपराधी बेखौफ हैं। रात के समय बार और डिस्को के बाहर (Urban security concerns) को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या अब मामूली विवादों का फैसला सड़क पर सरेआम कत्ल करके होगा? पुलिस के लिए यह केस सुलझाना और मुख्य आरोपियों को पकड़ना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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