UrbanPollProtest – कोल्हान में निकाय चुनाव के खिलाफ तीन दिन बंद का आह्वान
UrbanPollProtest – झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव को लेकर विरोध तेज हो गया है। आदिवासी छात्र एकता की केंद्रीय कमेटी ने 21 से 23 फरवरी तक तीन दिन के शांतिपूर्ण बंद का आह्वान किया है। संगठन का कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकाय चुनाव कराने का निर्णय संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।

बुधवार को संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राज्य सरकार और राज्यपाल के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में नगर निकाय चुनाव कराने से पहले विशेष विधायी प्रावधान होना चाहिए।
संवैधानिक प्रावधानों का हवाला
संगठन का तर्क है कि भारतीय संविधान के भाग IX-A के प्रावधान अनुसूचित क्षेत्रों पर स्वतः लागू नहीं होते। ग्रामीण इलाकों के लिए संसद ने पेसा कानून 1996 बनाया था, लेकिन नगर निकायों के संदर्भ में ऐसा कोई पृथक विस्तार अधिनियम नहीं लाया गया। ऐसे में झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत चुनाव कराना अनुच्छेद 244(1) की भावना के विपरीत बताया जा रहा है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष संवैधानिक सुरक्षा दी गई है। संगठन का दावा है कि बिना स्पष्ट कानूनी ढांचे के निकाय चुनाव कराने से इन अधिकारों पर असर पड़ सकता है।
तीन दिवसीय बंद की तैयारी
संगठन ने बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर चक्का जाम की चेतावनी दी है। हालांकि उन्होंने इसे शांतिपूर्ण रखने की बात कही है। प्रतिनिधिमंडल में नंदलाल सरदार, अमूल्य मुर्मू, रावण टुडू और अजीत सरदार सहित अन्य सदस्य शामिल थे। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है।
23 फरवरी को प्रस्तावित मतदान
राज्य में 23 फरवरी को 48 नगर निकायों में मतदान होना है और 27 फरवरी से मतगणना शुरू होगी। विभिन्न राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है। रांची, धनबाद और जमशेदपुर सहित कई नगर निगमों में चुनावी गतिविधियां जारी हैं।
फिलहाल कोल्हान क्षेत्र में विरोध और चुनावी तैयारियां समानांतर रूप से चल रही हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, जबकि विरोध कर रहे संगठनों ने अपनी मांगों पर पुनर्विचार की अपील की है।



