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EnergySecurity – सीजफायर के बाद खाड़ी में भारत की कूटनीतिक सक्रियता तेज

EnergySecurity – मिडिल ईस्ट में हालिया तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम ने कई देशों को राहत का मौका दिया है। भारत भी इस बदलते माहौल को अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप इस्तेमाल करने की कोशिश में जुट गया है। खासतौर पर ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए भारत ने खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसी क्रम में केंद्र सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री महत्वपूर्ण विदेश दौरों पर निकल चुके हैं।

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कतर दौरे पर पेट्रोलियम मंत्री की अहम पहल

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी इस समय कतर के दौरे पर हैं, जो मौजूदा परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फरवरी के अंत में शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्ष के बाद यह किसी भारतीय मंत्री का पहला खाड़ी दौरा है। इस दौरान कतर के ऊर्जा क्षेत्र पर भी असर पड़ा था, खासकर तब जब ईरान ने कतर एनर्जी से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया था।

भारत के लिए कतर का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि देश की कुल एलएनजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा यहीं से पूरा होता है। ऐसे में इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना और पहले से हुए दीर्घकालिक समझौतों को सुरक्षित रखना है।

ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता पर फोकस

युद्धविराम के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से खुलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो वैश्विक ऊर्जा परिवहन का अहम मार्ग है। भारत चाहता है कि इस रास्ते से आने वाली एलएनजी और एलपीजी की सप्लाई बिना किसी बाधा के जारी रहे।

हाल ही में भारत और कतर के बीच लंबे समय के लिए गैस आपूर्ति को लेकर समझौते हुए हैं, जो 2048 तक प्रभावी रहेंगे। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में इन समझौतों की निरंतरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत के लिए प्राथमिकता बन गया है।

यूएई दौरे पर विदेश मंत्री की रणनीतिक बातचीत

पेट्रोलियम मंत्री के दौरे के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर जाएंगे। यूएई भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में शामिल है और कच्चे तेल की आपूर्ति में उसका महत्वपूर्ण योगदान है।

इस दौरे के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय कामकाजी समुदाय रहता है, जिसकी सुरक्षा किसी भी संकट के दौरान भारत के लिए अहम विषय रहती है।

समुद्री मार्ग और व्यापारिक सुरक्षा पर ध्यान

संघर्ष के दौरान समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी, खासकर उन रास्तों पर जहां से तेल और गैस की आपूर्ति होती है। अब जब हालात कुछ हद तक सामान्य हो रहे हैं, भारत ऐसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ समन्वय बढ़ाना चाहता है जो क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद कर सकें।

यूएई जैसे देशों के साथ सहयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे न सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति बल्कि व्यापारिक गतिविधियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

घरेलू बाजार में आपूर्ति बनी रही स्थिर

केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश के भीतर ईंधन आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए समय रहते कदम उठाए गए थे।

हाल ही में भारतीय ध्वज वाला एक जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज मार्ग पार कर मुंबई पहुंचा, जो इस बात का संकेत है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को संभालने में सफल रहा है।

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