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RajyaSabhaElection – राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को मिला झटका, एनडीए के हाथ आई बढ़त

RajyaSabhaElection – देश के तीन राज्यों में सोमवार को हुई राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया ने राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया। बिहार, ओडिशा और हरियाणा की कुल 11 सीटों पर हुए मतदान में विपक्षी दल अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने उम्मीद से बेहतर परिणाम हासिल किए। खासतौर पर बिहार और ओडिशा में विधायकों के एकजुट न रहने से विपक्ष को नुकसान उठाना पड़ा, जिसका सीधा लाभ सत्तारूढ़ गठबंधन को मिला।

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बिहार में रणनीतिक चूक से विपक्ष पिछड़ा

बिहार की पांच सीटों पर चुनाव दिलचस्प हो गया था क्योंकि यहां एक अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में था। आंकड़ों के लिहाज से मुकाबला कड़ा माना जा रहा था, लेकिन अंततः एनडीए ने सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर ली। इस जीत में जेडीयू और भाजपा के प्रमुख नेताओं के साथ अन्य सहयोगी दलों के उम्मीदवार भी शामिल रहे।

विपक्षी महागठबंधन के पास सीमित संख्या में विधायक थे, लेकिन अन्य दलों के समर्थन से उन्हें बढ़त मिलने की उम्मीद थी। हालांकि मतदान के दौरान कुछ विधायकों की अनुपस्थिति ने पूरा समीकरण बदल दिया। बताया गया कि चार विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए, जिससे विपक्ष की संभावनाएं कमजोर पड़ गईं। पहली वरीयता के मतों से नतीजा स्पष्ट नहीं होने पर दूसरी वरीयता की गिनती की गई, जिसमें एनडीए उम्मीदवार को बढ़त मिल गई।

इस घटनाक्रम के बाद महागठबंधन ने आरोप लगाया कि उनके विधायकों पर दबाव बनाया गया और राजनीतिक लाभ के लिए अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल हुआ। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक जानकार इसे संगठनात्मक कमजोरी और रणनीतिक चूक का परिणाम मान रहे हैं।

ओडिशा में क्रॉस-वोटिंग ने बदला खेल

ओडिशा में भी चुनावी नतीजों ने अप्रत्याशित मोड़ लिया। यहां चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवारों के बीच मुकाबला था। गणित के अनुसार बीजद और कांग्रेस मिलकर अपने उम्मीदवार को आसानी से जिता सकते थे, लेकिन मतदान के दौरान क्रॉस-वोटिंग ने पूरी तस्वीर बदल दी।

सूत्रों के अनुसार, बीजद और कांग्रेस के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया, जिससे भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को बढ़त मिल गई। इसके परिणामस्वरूप भाजपा के दो उम्मीदवारों के साथ बीजद का एक प्रत्याशी और एक निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा।

बीजद नेतृत्व ने इस परिणाम पर नाराजगी जताई है और पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। पार्टी प्रमुख ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए बाहरी दबाव और अनुचित तरीकों का सहारा लिया गया। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं आई है।

हरियाणा में मतगणना में देरी, परिणाम बराबरी पर

हरियाणा में दो सीटों के लिए हुए चुनाव में भी स्थिति कुछ समय के लिए असमंजसपूर्ण रही। मतदान के बाद गोपनीयता भंग होने की शिकायतों के चलते मतगणना में कई घंटों की देरी हुई। देर रात आए परिणामों में भाजपा और कांग्रेस ने एक-एक सीट जीत ली।

भाजपा के उम्मीदवार को मामूली बढ़त के साथ जीत मिली, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की। निर्दलीय उम्मीदवार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। यह परिणाम राज्य की मौजूदा राजनीतिक संतुलन को दर्शाता है, जहां दोनों प्रमुख दलों की पकड़ लगभग बराबर बनी हुई है।

कई सीटों पर निर्विरोध जीत

इस चुनाव प्रक्रिया के तहत कुल 37 सीटों के लिए अधिसूचना जारी की गई थी, जिनमें से 26 सीटों पर केवल एक-एक उम्मीदवार होने के कारण मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी। विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेताओं का इन सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ, जिससे चुनावी प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा पहले ही तय हो गया था।

इन परिणामों ने साफ कर दिया है कि राज्यसभा चुनाव केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति, दलों की एकजुटता और विधायकों की निष्ठा का भी परीक्षण होते हैं। आने वाले समय में इन नतीजों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।

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