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SupremeCourt – बंगाल में जजों के घेराव पर सख्ती, सरकार से मांगा जवाब

SupremeCourt – पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई घेराव की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के प्रति अस्वीकार्य रवैया दर्शाता है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया और कानून के शासन दोनों के लिए चुनौती हैं।

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मालदा घटना पर अदालत की तीखी टिप्पणी
यह मामला मालदा जिले से जुड़ा है, जहां बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने तीन महिला न्यायिक अधिकारियों सहित सात अधिकारियों को घेर लिया था। इस घटना पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार से कड़े सवाल पूछे। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन ने समय रहते स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए, जो चिंताजनक है।

अधिकारियों को जारी किया गया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, जिला मजिस्ट्रेट और संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन सभी अधिकारियों को 6 अप्रैल को अदालत में पेश होकर यह स्पष्ट करना होगा कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। अदालत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सूचना मिलने के बावजूद मौके पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं की गई।

राजनीतिक माहौल पर भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के राजनीतिक माहौल पर भी टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राज्य में अत्यधिक ध्रुवीकरण नजर आता है, जो प्रशासनिक निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे केंद्रीय एजेंसी को सौंपने पर विचार किया जा सकता है।

घटना को बताया न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह घटना केवल अधिकारियों को डराने का प्रयास नहीं थी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की मंशा भी दिखाती है। कोर्ट के अनुसार, इस तरह की गतिविधियां कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं और इन्हें किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ किया कि कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।

कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि घेराव की शुरुआत दोपहर करीब साढ़े तीन बजे हुई थी, लेकिन शाम तक भी स्थिति को नियंत्रित नहीं किया जा सका। अदालत को बताया गया कि स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी समय पर मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इस देरी को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई और जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई।

सुरक्षा को लेकर दिए गए स्पष्ट निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों को खतरा महसूस हो रहा है, उनके आवास पर भी सुरक्षा बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि सुनवाई स्थलों पर भीड़ नियंत्रण के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं, ताकि कार्यवाही प्रभावित न हो।

राज्य सरकार से मांगी गई अनुपालन रिपोर्ट
अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन आदेशों के पालन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इसमें यह भी बताया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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