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USTradePolicy – सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में नई हलचल

USTradePolicy – अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर आए न्यायिक फैसले के बाद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नई सक्रियता देखी जा रही है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक वैश्विक टैरिफ आदेश को निरस्त किए जाने के कुछ ही दिनों के भीतर अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक नई दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर द्विपक्षीय व्यापार पर चर्चा की।

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लंच बैठक में आर्थिक साझेदारी पर फोकस

नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात की जानकारी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर साझा की। दोनों पक्षों ने इसे सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत बताया। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, बैठक में व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के विकल्पों पर विचार किया गया। हालांकि भारतीय वाणिज्य मंत्रालय की ओर से औपचारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया।

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर काम कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने इन वार्ताओं की दिशा और समय-सीमा दोनों को प्रभावित किया है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और टैरिफ विवाद

20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को अमान्य ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर व्यापक व्यापार शुल्क लागू करना संवैधानिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए।

इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का सहारा लेते हुए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का नया अस्थायी वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया। यह टैरिफ 150 दिनों के लिए प्रभावी बताया गया है और इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक ले जाने की भी संभावना जताई गई है। यह शुल्क मौजूदा MFN दरों के अतिरिक्त लागू है।

द्विपक्षीय समझौते पर असर

6 फरवरी को जारी संयुक्त बयान के आधार पर भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी थी। भारतीय वार्ताकारों की टीम को वाशिंगटन जाकर बातचीत आगे बढ़ानी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस दौरे को स्थगित कर दिया गया।

पहले प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अमेरिका भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को घटाने पर विचार कर रहा था। इसके बदले में भारत कुछ रणनीतिक और ऊर्जा आयात से जुड़े कदमों पर सहमति दे सकता था। हालांकि अब नई परिस्थितियों में इस समझौते की शर्तों की समीक्षा आवश्यक मानी जा रही है।

संवैधानिक सीमाओं की चर्चा

संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में टैरिफ निर्धारण का अधिकार मूलतः कांग्रेस के पास है। कार्यपालिका द्वारा उठाए गए कदम न्यायिक समीक्षा के दायरे में आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में कोई भी द्विपक्षीय टैरिफ व्यवस्था अमेरिकी संवैधानिक ढांचे और विधायी सीमाओं के अनुरूप ही तैयार की जानी होगी।

आगे की राह

व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि भारत और अमेरिका दोनों ही इस समय कानूनी और आर्थिक पहलुओं का आकलन कर रहे हैं। नई वैश्विक टैरिफ नीति के बाद देश-विशिष्ट रियायतों की संभावना सीमित हो सकती है। ऐसे में दोनों पक्षों को एक संतुलित और कानूनी रूप से टिकाऊ ढांचा तैयार करना होगा।

लुटनिक की भारत यात्रा को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि आधिकारिक वार्ताओं के बाद उनका कार्यक्रम निजी बताया गया, लेकिन इस मुलाकात ने यह संकेत जरूर दिया है कि दोनों देश बदलती परिस्थितियों के बीच संवाद बनाए रखना चाहते हैं।

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