लाइफ स्टाइल

HolikaDahan2026 – फाल्गुन पूर्णिमा पर शुभ मुहूर्त में करें दहन

HolikaDahan2026 – फाल्गुन पूर्णिमा पर होने वाला होलिका दहन हिंदू परंपरा में विशेष स्थान रखता है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में लोग इस अवसर पर विधि-विधान से पूजा करते हैं और अग्नि में अलग-अलग सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि होलिका की अग्नि में नकारात्मकता का अंत होता है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। इस वर्ष तिथियों और ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण मुहूर्त को लेकर खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

holika dahan 2026 shubh muhurat timing

इस दिन होगा होलिका पूजन और दहन

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार वर्ष 2026 में होलिका पूजन और दहन 2 मार्च, सोमवार को किया जाएगा। रंगों का उत्सव 4 मार्च, बुधवार को मनाया जाएगा। वाराणसी से प्रकाशित पंचांग के मुताबिक 2 मार्च को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 16 मिनट पर होगा। चतुर्दशी तिथि शाम 5 बजकर 18 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद पूर्णिमा प्रारंभ होगी। आश्लेषा नक्षत्र सुबह 7 बजकर 24 मिनट तक रहेगा और उसके बाद मघा नक्षत्र प्रभावी होगा। अतिगंड योग दोपहर 12 बजकर 6 मिनट तक रहेगा, फिर सुकर्मा योग शुरू होगा। पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी।

भद्रा काल में सावधानी जरूरी

धार्मिक मान्यता है कि होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में और भद्रा रहित समय में रात्रि के दौरान करना शुभ होता है। इस बार 2 मार्च की शाम 5 बजकर 18 मिनट से 3 मार्च की सुबह 4 बजकर 56 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। ऐसे में पूरी रात भद्रा और पूर्णिमा का संयोग बनेगा। शास्त्रों के अनुसार जब पूरी रात भद्रा हो, तो उसके पुच्छ काल में दहन करना श्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष भद्रा का पुच्छ काल रात 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। कुल मिलाकर 1 घंटा 12 मिनट की यह अवधि सबसे उपयुक्त मानी जा रही है।

अग्नि में अर्पित की जाने वाली सामग्री का महत्व

होलिका दहन के समय अग्नि में कुछ विशेष वस्तुएं डालने की परंपरा है। इनका धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व बताया गया है।

लौंग का महत्व

मान्यता है कि होलिका की अग्नि में लौंग अर्पित करने से मानसिक तनाव और उलझनें कम होती हैं। कई परिवार घर की शांति और सकारात्मक वातावरण के लिए इसे अर्पित करते हैं। लौंग को नकारात्मक ऊर्जा दूर करने का प्रतीक भी माना जाता है।

उपले या गोबर के कंडे

होलिका दहन में उपलों का प्रयोग लंबे समय से होता आ रहा है। धार्मिक दृष्टि से इन्हें शुद्धता का प्रतीक माना गया है। ऐसा विश्वास है कि उपले अग्नि को पवित्र बनाते हैं और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक होते हैं।

हल्दी की गांठ

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सात हल्दी की गांठें अर्पित करना शुभ फलदायी माना जाता है। खासकर विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए लोग यह उपाय करते हैं। वैवाहिक जीवन में सौहार्द बनाए रखने की कामना से भी हल्दी अर्पित की जाती है।

हरी इलायची

कुछ परंपराओं में हरी इलायची को भी अग्नि में अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इससे निर्णय क्षमता मजबूत होती है और व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलता है। व्यापारी वर्ग के बीच यह परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है।

चंदन और बताशे

चंदन को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। इसे अग्नि में अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है। वहीं बताशे डालने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है, जिसे खुशहाली और ऐश्वर्य से जोड़ा जाता है।

गुड़ का अर्पण

धार्मिक विश्वास है कि गुड़ अर्पित करने से आर्थिक कठिनाइयों में कमी आती है। कुछ लोग कर्ज से मुक्ति और आर्थिक स्थिरता की कामना के साथ इसे होलिका में डालते हैं।

होलिका दहन 2026 इस बार ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण चर्चा में है। श्रद्धालु निर्धारित मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। यह पर्व केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और नई शुरुआत का संदेश भी देता है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.