AgnipathRecruitment – अग्निपथ योजना में अब सिर्फ भारतीय गोरखाओं को मौका
AgnipathRecruitment – अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में होने वाली भर्ती प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। हाल में जारी भर्ती अधिसूचनाओं से संकेत मिलता है कि अब नेपाली गोरखाओं की भर्ती का रास्ता लगभग बंद हो गया है। आधिकारिक तौर पर इस बारे में अलग से कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन नए नोटिफिकेशन में केवल भारतीय गोरखाओं के लिए ही आवेदन का प्रावधान रखा गया है। इससे साफ होता है कि आगामी भर्ती प्रक्रिया में नेपाली नागरिक शामिल नहीं हो सकेंगे।

भर्ती अधिसूचना में बदलाव से संकेत स्पष्ट
जून से शुरू होने वाली भर्ती के लिए जारी अधिसूचना में ‘गोरखा’ की जगह ‘भारतीय गोरखा’ का उल्लेख किया गया है। इसे नीति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह परिवर्तन दर्शाता है कि अब केवल भारत में रहने वाले गोरखा समुदाय के युवा ही अग्निपथ योजना के तहत आवेदन कर पाएंगे। इस फैसले से भारतीय गोरखा युवाओं के लिए अवसर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
नेपाल के रुख ने बढ़ाई दूरी
चार वर्ष पहले जब अग्निपथ योजना लागू की गई थी, तब नेपाल ने इसका विरोध किया था। नेपाल का कहना था कि यह कदम भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच हुए पुराने त्रिपक्षीय समझौते की भावना के खिलाफ है। इस समझौते के तहत गोरखा सैनिकों की भर्ती के नियम तय किए गए थे। नेपाल ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद वहां स्थित भारतीय सेना के भर्ती केंद्र भी बंद हो गए। भारत ने इस मुद्दे पर बातचीत की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
बदलते हालात और नई प्राथमिकताएं
सूत्रों के मुताबिक, नेपाल में हाल के वर्षों में भारत के प्रति बदलते राजनीतिक माहौल ने भी इस फैसले को प्रभावित किया है। इसके अलावा, नेपाली गोरखाओं के लिए अन्य देशों में सुरक्षा सेवाओं में बेहतर अवसर उपलब्ध हैं। सिंगापुर, ब्रिटेन और अन्य देशों में निजी सुरक्षा एजेंसियों में उन्हें आकर्षक वेतन और सुविधाएं मिलती हैं, जिससे सेना में भर्ती के प्रति उनका रुझान पहले ही कम हो चुका था।
वैश्विक अवसरों ने भी बदली स्थिति
रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान भी नेपाली युवाओं के लिए विदेशी सेनाओं में शामिल होने के अवसर सामने आए। वहीं, ब्रिटेन की सेना में गोरखा रेजिमेंट के लिए भर्ती पहले की तरह जारी है। इन परिस्थितियों ने भी भारतीय सेना में पारंपरिक रूप से होने वाली भर्ती के स्वरूप को प्रभावित किया है। जानकार मानते हैं कि यह बदलाव समय के साथ विकसित हो रही वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम है।
भारतीय सेना में अब भी मजबूत उपस्थिति
हालांकि नई भर्ती में बदलाव हुआ है, लेकिन भारतीय सेना में पहले से कार्यरत नेपाली गोरखाओं की संख्या अभी भी काफी बड़ी है। बताया जाता है कि सात गोरखा राइफल्स में करीब 30 हजार से अधिक नेपाली सैनिक सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा, बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों को भारत सरकार की ओर से हर साल पेंशन भी दी जाती है, जो दोनों देशों के बीच पुराने सैन्य संबंधों को दर्शाता है।
इस बदलाव के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि भविष्य में भारत और नेपाल इस मुद्दे पर किस तरह की सहमति बनाते हैं और क्या पारंपरिक भर्ती व्यवस्था में कोई नया रास्ता निकलता है।



