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Agniveer Selection Process Rules 2026: वर्दी का सपना और सात फेरों की पाबंदी, जानें क्यों स्थायी होने तक नहीं बज पाएगी अग्निवीरों की शहनाई…

Agniveer Selection Process Rules 2026: भारतीय सेना की महत्वाकांक्षी ‘अग्निवीर’ योजना अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। साल 2022 में जिस पहले जत्थे ने देश सेवा का संकल्प लिया था, उनका चार साल का कार्यकाल इस वर्ष पूरा होने जा रहा है। जून-जुलाई के महीने में करीब 20 हजार से अधिक जवान (Service completion) के बाद अपनी वर्दी उतारेंगे। हालांकि, यह सफर सबके लिए खत्म नहीं होगा; इनमें से केवल 25 प्रतिशत सबसे कुशल और जांबाज जवानों को ही भारतीय सेना में स्थायी कमीशन के जरिए वापस लौटने का मौका मिलेगा।

Agniveer Selection Process Rules 2026
Agniveer Selection Process Rules 2026
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स्थायी सैनिक बनने के लिए ‘कुंवारा’ होना अनिवार्य

सेना ने स्थायी सैनिक के रूप में चयन के लिए बेहद कड़े और अनुशासनबद्ध नियम साझा किए हैं, जिसमें जवानों की वैवाहिक स्थिति को लेकर सबसे बड़ा अपडेट सामने आया है। आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, जो जवान (Permanent commission) पाने की इच्छा रखते हैं, उन्हें अपनी पूरी चयन प्रक्रिया खत्म होने तक अविवाहित रहना होगा। सेना का मानना है कि प्रशिक्षण और सेवा की शुरुआती कठोरता के लिए जवान का मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह समर्पित होना आवश्यक है, जिसमें वैवाहिक बंधन एक बाधा बन सकते हैं।

सेवाकाल से चयन तक लागू रहेगी पाबंदी

नियमों की बारीकियों को समझें तो पाबंदी केवल चार साल की नौकरी तक सीमित नहीं है। सेवामुक्त होने के तुरंत बाद भी जवान विवाह नहीं कर सकेंगे। जब तक स्थायी सैनिक के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया (Application criteria) समाप्त नहीं हो जाती और आधिकारिक मेरिट लिस्ट में नाम नहीं आ जाता, तब तक उन्हें ‘बैचलर’ ही रहना होगा। इस बीच यदि कोई भी जवान गुपचुप तरीके से या सामाजिक रूप से विवाह के बंधन में बंधता है, तो उसे चयन प्रक्रिया से तुरंत बाहर कर दिया जाएगा।

अनुशासन की कसौटी और अयोग्यता का डर

सेना ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों का उल्लंघन सीधे तौर पर अयोग्यता का कारण बनेगा। 21 वर्ष की आयु में भर्ती होने वाले ये जवान जब 25 वर्ष के होंगे, तब वे (Eligibility standards) के अगले चरण में प्रवेश करेंगे। इस संक्रमण काल में लगभग 4 से 6 महीने का अतिरिक्त समय लग सकता है। सेना का तर्क है कि जब तक जवान आधिकारिक रूप से स्थायी कैडर का हिस्सा नहीं बन जाते, तब तक उन्हें भर्ती के समय तय किए गए अनुशासन और सेवा की शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा।

दक्षता और परीक्षा के आधार पर होगा अंतिम चयन

स्थायी होने की राह केवल वैवाहिक स्थिति पर नहीं, बल्कि चार साल के शानदार रिकॉर्ड पर टिकी है। इन जवानों को कड़ी शारीरिक परीक्षा, लिखित मूल्यांकन और (Performance appraisal) के दौर से गुजरना होगा। केवल वे ही जवान आवेदन के पात्र होंगे जिन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल में कोई अनुशासनहीनता नहीं की है। सेना इन 25 फीसदी पदों के लिए सबसे बेहतरीन ‘प्रोफेशनल सोल्जर्स’ को चुनना चाहती है, जो भविष्य में सेना की रीढ़ बन सकें।

युवा जोश और भविष्य की नई चुनौतियां

अग्निवीरों के सामने यह समय किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ घर-परिवार का दबाव और दूसरी तरफ (Career growth) की असीम संभावनाएं हैं। सेना के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय फौज में जगह पाना केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि एक कठिन जीवनशैली को अपनाना है। जो जवान इन कड़े मानकों पर खरे उतरेंगे, वे न केवल देश की रक्षा करेंगे बल्कि एक सुरक्षित और गौरवशाली करियर का हिस्सा भी बनेंगे।

2026 का लक्ष्य और सेना का आधुनिकीकरण

अग्निवीर योजना का यह पहला निष्कर्ष 2026 में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। चयन की यह (Rigorous selection) प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि सेना में केवल वही युवा शामिल हों जो पूरी तरह से मिशन के प्रति केंद्रित हैं। आने वाले महीनों में होने वाले ये चयन न केवल हजारों युवाओं का भविष्य तय करेंगे, बल्कि यह भी साबित करेंगे कि अग्निपथ योजना जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी रही है।

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