राष्ट्रीय

AISummitControversy – रोबोडॉग विवाद के बाद चर्चा में आईं गलगोटिया की प्रोफेसर

AISummitControversy – दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान गलगोटिया विश्वविद्यालय अनपेक्षित विवादों में घिर गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पवेलियन पर प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग को लेकर उठे सवालों ने पूरे आयोजन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। संस्थान की ओर से इसे अपने उत्कृष्टता केंद्र में विकसित उत्पाद बताया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने इस दावे पर आपत्ति जताई। इसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।

galgotias robodog ai summit row

प्रोफेसर पर केंद्रित हुआ विवाद

इस प्रकरण में विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नेहा सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रदर्शित रोबोटिक डॉग को संस्थान में विकसित बताया था। जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, सोशल मीडिया पर उनके पेशेवर प्रोफाइल को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।

बताया जाता है कि उनका लिंक्डइन प्रोफाइल, जिसमें उनके शैक्षणिक और पेशेवर अनुभव का विवरण उपलब्ध था, शुरुआती दिनों में सक्रिय था। बाद में उस पेज पर 404 त्रुटि संदेश दिखने लगा, जिससे यह अटकलें लगाई गईं कि प्रोफाइल हटा दिया गया है। हालांकि इस संबंध में उनकी ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।

समिट से हटाया गया पवेलियन

विवाद के बाद आयोजकों ने विश्वविद्यालय के पवेलियन को समिट से हटाने का निर्णय लिया। जानकारी के अनुसार, स्टॉल की बिजली आपूर्ति रोक दी गई और संबंधित टीम को कार्यक्रम स्थल से बाहर कर दिया गया। यह कदम आयोजन की साख बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया बताया गया।

घटना के बाद विश्वविद्यालय ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर खेद प्रकट किया। संस्थान ने कहा कि उत्पाद की तकनीकी पृष्ठभूमि को लेकर गलत जानकारी साझा की गई और यह प्रस्तुति संस्थागत नीति के अनुरूप नहीं थी।

संस्थान का स्पष्टीकरण

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि किसी प्रकार की जानबूझकर भ्रामक प्रस्तुति का उद्देश्य नहीं था। बयान में कहा गया कि पवेलियन संभाल रही प्रतिनिधि को उत्पाद के तकनीकी स्रोत की पूरी जानकारी नहीं थी और मीडिया के समक्ष उत्साह में तथ्यात्मक त्रुटि हो गई।

साथ ही यह भी कहा गया कि संबंधित प्रोफेसर को आधिकारिक तौर पर मीडिया से बातचीत की अनुमति नहीं दी गई थी। संस्थान ने शैक्षणिक ईमानदारी और पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

रोबोटिक डॉग को लेकर क्या था दावा

समिट के दौरान ‘ओरियन’ नाम से प्रदर्शित रोबोटिक डॉग को विश्वविद्यालय के नवाचार के रूप में प्रस्तुत किया गया था। हालांकि सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे ‘यूनिट्री गो2’ मॉडल से मिलते-जुलते रूप में पहचाना। यह मॉडल एक अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक्स कंपनी द्वारा निर्मित है और शोध व शैक्षणिक प्रयोगों के लिए विभिन्न देशों में उपयोग किया जाता है।

इन दावों के बाद तकनीकी समुदाय में बहस छिड़ गई कि किसी उत्पाद को प्रदर्शित करते समय उसकी उत्पत्ति और विकास से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से साझा की जानी चाहिए।

व्यापक प्रभाव और सीख

इस घटना ने शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार प्रस्तुत करने की प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मंचों पर भागीदारी करते समय पारदर्शिता और सटीक जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भ्रम की स्थिति न बने।

एआई समिट जैसे आयोजनों में जहां तकनीकी विश्वसनीयता दांव पर होती है, वहां तथ्यात्मक सटीकता की अहमियत और बढ़ जाती है। फिलहाल, विश्वविद्यालय की ओर से जारी माफीनामे के बाद मामला शांत होने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है, लेकिन इस घटना ने संस्थागत जवाबदेही पर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.