Alwar Road Acciden: दिल दहला देने वाला मंजर! दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर गूंजी चीखें, तीन जिंदगियां बनीं राख
Alwar Road Acciden: राजस्थान के अलवर जिले में बुधवार की सुबह एक ऐसी दर्दनाक खबर लेकर आई, जिसने सुनने वाले हर शख्स की रूह को कंपा दिया। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर हुए एक रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में तीन लोग जिंदा जलकर मौत के आगोश में समा गए। यह हादसा इतना भीषण था कि (highway safety concerns) को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। रफ्तार के इस कहर ने कुछ ही मिनटों में सब कुछ राख कर दिया और घटनास्थल पर केवल धुएं का गुबार और जली हुई गाड़ियां ही शेष रह गईं।

लोहे के पिंजरे में तब्दील हुई पिकअप
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दिल्ली से जयपुर की ओर जा रही एक पिकअप गाड़ी अचानक किसी अज्ञात वाहन से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पिकअप का अगला हिस्सा पिचककर किसी मलबे जैसा हो गया। इसी (vehicle fire safety) की कमी या शॉर्ट सर्किट के कारण गाड़ी ने तुरंत आग पकड़ ली। गाड़ी में सवार तीन लोग बुरी तरह से अंदर फंस गए थे, उन्हें बाहर निकलने का एक भी मौका नहीं मिला और देखते ही देखते वे आग की लपटों के बीच विलीन हो गए।
चीखें अनसुनी और प्रयास रहे नाकाम
हादसे के समय मौके पर मौजूद राहगीरों ने फंसे हुए लोगों को निकालने की हर संभव कोशिश की, लेकिन आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि किसी का भी पास जाना मुमकिन नहीं था। इस (emergency rescue efforts) के विफल होने का मलाल वहां मौजूद हर चश्मदीद की आंखों में साफ दिख रहा था। लोगों ने बताया कि टक्कर के बाद हुए विस्फोट और धू-धू कर जलती गाड़ी ने बचाव के सारे रास्ते बंद कर दिए थे, जिससे मदद के लिए हाथ भी नहीं बढ़ाए जा सके।
ड्राइवर की हालत गंभीर, जयपुर रेफर
इस प्रलयकारी दुर्घटना में पिकअप के ड्राइवर की जान तो बच गई, लेकिन उसकी हालत बहुत नाजुक बनी हुई है। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे तुरंत (medical emergency trauma) सेंटर जयपुर के लिए रेफर कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार ड्राइवर काफी हद तक झुलस गया है और उसके शरीर पर अंदरूनी चोटें भी आई हैं। वह इस समय बयान देने की स्थिति में नहीं है, जो इस हादसे की असली वजह जानने के लिए बेहद महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।
रैणी पुलिस की जांच और शिनाख्त की कोशिश
हादसे की जानकारी मिलते ही रैणी थाना पुलिस दलबल के साथ चैनल नंबर 131 पर पहुंची, जहां एक्सप्रेसवे पर मौत का तांडव हुआ था। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद (accident victim identification) की प्रक्रिया शुरू की है। फिलहाल तीनों मृतकों के शवों को रैणी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। उनकी शिनाख्त अभी तक नहीं हो पाई है, क्योंकि आग में उनके दस्तावेज और पहचान से जुड़ी चीजें भी जलकर खाक हो चुकी हैं।
एक्सप्रेसवे के चैनल नंबर 131 पर पसरा सन्नाटा
दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे के जिस हिस्से पर यह हादसा हुआ, वहां अब केवल सन्नाटा और मातम पसरा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पिकअप जिस (unknown vehicle collision) का शिकार हुई, वह कौन सा था। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या यह गलती ओवरटेकिंग की थी या फिर किसी वाहन ने पीछे से जोरदार टक्कर मारी थी। एक्सप्रेसवे पर बढ़ते हादसे अब यात्रियों के मन में भय पैदा कर रहे हैं।
पहचान की तलाश में जुटी खाकी
मृतकों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए पुलिस अब दिल्ली और जयपुर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से संपर्क साध रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य (missing person reports) के आधार पर परिजनों तक पहुंचना है ताकि शवों का पोस्टमार्टम कर उन्हें अंतिम विदाई दी जा सके। अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि वे लोग दिल्ली से व्यापार के सिलसिले में जयपुर जा रहे थे या किसी निजी कार्य से, पर इस हादसे ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं।
सुरक्षा मानकों पर उठते गंभीर सवाल
यह भीषण अग्निकांड हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के इंतजाम कितने पुख्ता हैं। तेज रफ्तार सड़कों पर अक्सर (road traffic regulations) की अनदेखी जानलेवा साबित होती है। अलवर का यह हादसा एक चेतावनी है कि सड़कों पर रफ्तार के साथ-साथ वाहनों की फिटनेस और चालकों की सतर्कता कितनी जरूरी है। जब तक हर यात्री सुरक्षित घर नहीं पहुंच जाता, तब तक विकास की इन सड़कों का सफर अधूरा ही माना जाएगा।



