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Rajyasabha Election 2026 Predictions: शरद पवार के भविष्य पर ओवैसी का बड़ा दावा, गरमाई महाराष्ट्र की सियासत

Rajyasabha Election 2026 Predictions: लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार के राज्यसभा कार्यकाल को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है। ओवैसी का कहना है कि शरद पवार के पास दोबारा सदन में पहुंचने के लिए आवश्यक विधायकों का संख्या बल (Numerical strength) नहीं है। उनका कार्यकाल मार्च 2026 में समाप्त हो रहा है और ओवैसी ने भविष्यवाणी की है कि इस चुनाव के दौरान एक बड़ा राजनीतिक तमाशा देखने को मिलेगा।

Rajyasabha Election 2026 Predictions
Rajyasabha Election 2026 Predictions

संख्या बल का गणित और ओवैसी की भविष्यवाणी

ओवैसी ने शरद पवार की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके गठबंधन के पास इतने विधायक नहीं हैं कि वे उन्हें आसानी से राज्यसभा भेज सकें। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि अगर वे दोबारा चुनकर आते हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि वे (Voting patterns) और समर्थन कैसे जुटाते हैं। ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

2026 का राज्यसभा चुनाव: दिग्गजों की साख दांव पर

वर्ष 2026 में होने वाले ये चुनाव केवल शरद पवार के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के कई अन्य दिग्गजों के लिए भी निर्णायक साबित होंगे। इस साल कुल 72 सीटों पर मतदान होना है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पीएम एच डी देवगौड़ा और दिग्विजय सिंह जैसे (Political veterans) का कार्यकाल भी इस दौरान समाप्त हो रहा है। यदि ये नेता दोबारा निर्वाचित नहीं होते, तो संबंधित दलों के लिए सदन में अपनी आवाज बुलंद रखना एक चुनौती बन जाएगा।

उत्तर प्रदेश: सबसे बड़ी चुनावी रणभूमि

अप्रैल से नवंबर 2026 के बीच होने वाले इन चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण मुकाबला उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर होगा। नवंबर में होने वाले ये चुनाव (Electoral battleground) के लिहाज से बेहद अहम हैं क्योंकि यहां की जीत-हार केंद्र सरकार के मंत्रियों और विपक्ष के शीर्ष नेताओं का भविष्य तय करेगी। उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी सीटों का गणित काफी उलझा हुआ नजर आ रहा है।

मंत्रियों का भविष्य और सदन का संतुलन

इन चुनावों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मोदी सरकार के कई केंद्रीय मंत्रियों का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। हरदीप सिंह पुरी और जॉर्ज कुरियन जैसे (Cabinet ministers) को दोबारा सदन में वापस आना होगा ताकि वे अपने मंत्रालयों का प्रभार संभाल सकें। वहीं, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सीटों पर भी सबकी नजरें टिकी होंगी। मार्च से शुरू होने वाला यह चुनावी चक्र भारतीय राजनीति के ऊपरी सदन का स्वरूप बदल सकता है।

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