WhiteRice – चावल पकाने का तरीका भी सेहत पर डालता है असर
WhiteRice – चावल भारतीय भोजन का अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय अक्सर अलग-अलग देखने को मिलती है। कुछ लोग वजन बढ़ने और ब्लड शुगर बढ़ने की वजह से सफेद चावल कम खाने की सलाह देते हैं, जबकि कई न्यूट्रिशनिस्ट मानते हैं कि सही तरीके से पकाया गया चावल संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चावल का असर सिर्फ उसकी मात्रा पर नहीं बल्कि उसे पकाने के तरीके पर भी निर्भर करता है।

चावल पकाने के दो तरीके सबसे ज्यादा प्रचलित
घरों में आमतौर पर सफेद चावल पकाने के लिए दो तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। पहला तरीका खुले बर्तन में चावल उबालने का होता है और दूसरा तरीका प्रेशर कुकर में पकाने का। दोनों प्रक्रियाओं में चावल का टेक्सचर और पोषण स्तर अलग हो सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इन दोनों तरीकों के प्रभाव को समझने की सलाह देते हैं।
खुले बर्तन में उबले चावल क्यों माने जाते हैं हल्के
पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक जब चावल को खुले बर्तन में अधिक पानी डालकर पकाया जाता है, तब पकने के बाद अतिरिक्त पानी अलग कर दिया जाता है। इस पानी में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है। स्टार्च निकल जाने से चावल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कुछ हद तक कम हो सकती है। ऐसे चावल खाने के बाद शरीर भारी महसूस नहीं करता और कई लोगों को सुस्ती भी कम महसूस होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित मात्रा में इस तरह के चावल वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। साथ ही जिन लोगों को पाचन संबंधी दिक्कत या इंसुलिन संतुलन की समस्या होती है, उनके लिए भी यह तरीका फायदेमंद माना जाता है।
प्रेशर कुकर में पके चावल में बना रहता है स्टार्च
दूसरी ओर, प्रेशर कुकर में पकाए गए चावल में पानी पूरी तरह चावल में समा जाता है। इससे स्टार्च बाहर नहीं निकल पाता और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक बनी रहती है। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसे चावल शरीर में जल्दी ग्लूकोज रिलीज कर सकते हैं, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने की संभावना रहती है।
कुछ विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रेशर कुकर में पके चावल खाने के बाद पेट जल्दी भर जाता है, लेकिन थोड़ी देर बाद दोबारा भूख लग सकती है। इसका कारण ब्लड शुगर स्तर में तेजी से बदलाव माना जाता है। खासकर कम शारीरिक गतिविधि वाले लोगों को चावल की मात्रा नियंत्रित रखने की सलाह दी जाती है।
संतुलित मात्रा और सही संयोजन है जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल चावल को दोष देना सही नहीं माना जा सकता। अगर चावल को दाल, हरी सब्जियों और प्रोटीन वाले भोजन के साथ खाया जाए, तो उसका असर संतुलित किया जा सकता है। साथ ही नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित जीवनशैली भी जरूरी मानी जाती है।
स्वास्थ्य के अनुसार चुनें सही तरीका
न्यूट्रिशनिस्ट मानते हैं कि हर व्यक्ति की शारीरिक जरूरत अलग होती है। जिन लोगों को ब्लड शुगर, वजन या धीमे पाचन की समस्या है, उनके लिए खुले बर्तन में पकाए गए चावल बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वहीं सामान्य स्वास्थ्य वाले लोग सीमित मात्रा में किसी भी तरीके से बने चावल का सेवन कर सकते हैं।