AndamanAirport – ग्रेट निकोबार में नया एयरपोर्ट तीन साल में तैयार
AndamanAirport – अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण कार्य आगे बढ़ चुका है और प्रशासन को उम्मीद है कि अगले तीन वर्षों में यहां से उड़ान सेवाएं शुरू हो जाएंगी। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को सामरिक और नागरिक, दोनों दृष्टियों से अहम माना जा रहा है।

समयसीमा और परियोजना की प्रगति
केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल, सेवानिवृत्त एडमिरल डीके जोशी ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस परियोजना की प्रगति की जानकारी दी। उनके अनुसार, निर्माण प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है और निर्धारित समयसीमा के भीतर काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार पहले ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और अब जमीनी स्तर पर काम शुरू हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से लैस एयरपोर्ट तैयार किया जाएगा, जो बड़े विमानों के संचालन में सक्षम होगा।
दो रनवे और विस्तारित सैन्य ढांचा
प्रस्तावित एयरपोर्ट में दो रनवे होंगे, जिससे नागरिक और सैन्य दोनों तरह की उड़ानों को संभालने की क्षमता विकसित की जा सके। जानकारी के मुताबिक, द्वीप समूह के उत्तरी हिस्से में मौजूद एक सैन्य प्रतिष्ठान का भी उन्नयन किया जाएगा। वहां की हवाई पट्टी का विस्तार कर उसे अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत होगी। मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित होने के कारण यह इलाका वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
हिंद महासागर में रणनीतिक संतुलन
ग्रेट निकोबार द्वीप, अंडमान-निकोबार का सबसे दक्षिणी भाग है और मलक्का जलडमरूमध्य से लगभग 40 नौटिकल मील की दूरी पर स्थित है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक रास्तों में गिना जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार, हिंद महासागर में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए भारत इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है। नौसेना पहले से ही इस क्षेत्र में सक्रिय है और नया एयरपोर्ट उसकी परिचालन क्षमता को और विस्तार दे सकता है। जानकारों का कहना है कि इस परियोजना से समुद्री निगरानी, आपदा राहत और सुरक्षा अभियानों में तेजी आएगी।
स्थानीय संदर्भ और सामाजिक पहलू
यह एयरपोर्ट चिंगेनह क्षेत्र में बनाया जा रहा है, जिसे 2004 की सुनामी से पहले बसे गांवों में गिना जाता था। सुनामी के बाद यहां के निवासियों को अन्य स्थानों पर बसाया गया था। स्थानीय समुदाय के कुछ लोग अब भी वापसी की मांग करते रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण और सामाजिक संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, परियोजना के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि द्वीप की पारिस्थितिकी पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
पर्यटन और आर्थिक संभावनाएं
सैन्य महत्व के साथ-साथ इस परियोजना को पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर हवाई संपर्क से ग्रेट निकोबार में निवेश और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
इसके अलावा, हाल के महीनों में इस क्षेत्र में ऊर्जा संसाधनों की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा हुई है। पेट्रोलियम अन्वेषण से जुड़े प्रयासों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि द्वीप समूह के आसपास प्राकृतिक संसाधनों की खोज जारी है।
कुल मिलाकर, ग्रेट निकोबार में बन रहा यह एयरपोर्ट केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक योजना का हिस्सा है, जो सुरक्षा, संपर्क और आर्थिक विकास को एक साथ जोड़ने का प्रयास करती है।



