LGBTQRepresentation – राज्यसभा में मेनका गुरुस्वामी की ऐतिहासिक एंट्री दर्ज
LGBTQRepresentation – सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने भारतीय संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। वह LGBTQ+ समुदाय से आने वाली पहली सदस्य के रूप में राज्यसभा पहुंची हैं। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में 37 सीटों में से 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिनमें उनका नाम भी शामिल रहा। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पश्चिम बंगाल से उम्मीदवार बनाया था, और उनका चयन पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राज्यसभा चुनाव में निर्विरोध चयन की पृष्ठभूमि
इस बार के राज्यसभा चुनाव में कई सीटों पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनी, जिसके चलते 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले चुने गए। बाकी बची 11 सीटों के लिए मतदान सोमवार और मंगलवार को संपन्न हुआ। मेनका गुरुस्वामी का निर्विरोध चुना जाना न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का सम्मान माना जा रहा है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिनिधित्व में विविधता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के चयन से संसद में अलग-अलग सामाजिक समूहों की आवाज को मजबूती मिलती है।
कानूनी क्षेत्र में मजबूत पहचान
51 वर्षीय मेनका गुरुस्वामी देश की जानी-मानी संवैधानिक वकीलों में गिनी जाती हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। अपने पेशेवर जीवन में उन्होंने संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई है। उनकी पहचान एक ऐसी कानूनी विशेषज्ञ के रूप में रही है, जो संवैधानिक सिद्धांतों को मजबूती से प्रस्तुत करती हैं।
ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा नाम
मेनका गुरुस्वामी उस ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई का हिस्सा रही हैं, जिसने 2018 में सुप्रीम कोर्ट को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाने के लिए प्रेरित किया। इस फैसले के तहत 158 साल पुराने उस कानून को खत्म किया गया, जो सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध मानता था। इस निर्णय को LGBTQ+ समुदाय के अधिकारों के लिए एक मील का पत्थर माना गया। इस मुकदमे में उनकी साथी अरुंधती काटजू भी शामिल थीं, और दोनों ने मिलकर इस मुद्दे को न्यायपालिका के सामने मजबूती से रखा।
संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता
गुरुस्वामी ने अपने सार्वजनिक बयान में कहा है कि उनके काम का आधार हमेशा संविधान के मूल सिद्धांत—समानता, भाईचारा और भेदभाव रहित व्यवहार—रहे हैं। उनका कहना है कि राज्यसभा में पहुंचने के बाद भी वे इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगी। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह पश्चिम बंगाल के लोगों का प्रतिनिधित्व करते हुए उनकी आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाना चाहती हैं।
तृणमूल कांग्रेस की रणनीति और संकेत
तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के अनुसार, मेनका गुरुस्वामी का चयन पार्टी की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस रणनीति के तहत पार्टी ऐसे लोगों को संसद में भेजना चाहती है, जो शिक्षित हों और संविधान की गहरी समझ रखते हों। उनका मानना है कि ऐसे प्रतिनिधि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की बात को बेहतर तरीके से रख सकते हैं। गुरुस्वामी के शामिल होने के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के 13 सदस्यों में से पांच महिलाएं हो गई हैं, जो पार्टी में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता है।
अन्य उम्मीदवारों के साथ चयन प्रक्रिया
तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस बार कई प्रमुख नाम राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। इनमें राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री बाबुल सुप्रियो, पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और अभिनेत्री कोयल मलिक भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, जब गुरुस्वामी का चयन हुआ, उस समय वह दिल्ली में थीं, जिसके कारण वह विधानसभा में मौजूद नहीं रह सकीं। उनकी ओर से तृणमूल नेता अरूप बिस्वास ने प्रमाण-पत्र प्राप्त किया



