MaritimeSecurity – हॉर्मुज में भारतीय जहाजों पर फायरिंग से बढ़ी चिंता
MaritimeSecurity – स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर हुई फायरिंग की घटना को भारत सरकार ने गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में लिया है। 18 अप्रैल को हुई इस घटना के बाद नई दिल्ली ने तत्काल कूटनीतिक सक्रियता दिखाते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया और औपचारिक रूप से विरोध दर्ज कराया। फिलहाल इस अहम समुद्री मार्ग में मौजूद भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय नौसेना भी सक्रिय भूमिका में आ गई है।

कूटनीतिक स्तर पर तेज हुई बातचीत
घटना के तुरंत बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी प्रतिनिधि से मुलाकात कर भारत की चिंताओं को विस्तार से रखा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी स्पष्ट किया कि भारत लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है और सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित कराने की दिशा में काम कर रहा है। शुरुआती संकेतों के मुताबिक, यह घटना स्थानीय स्तर पर संचार की कमी के कारण हुई हो सकती है, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए विस्तृत जांच जारी है।
घटना का विवरण और नुकसान की स्थिति
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस फायरिंग में शामिल दोनों भारतीय जहाजों को बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। कुछ हिस्सों में कांच टूटने जैसी मामूली क्षति की बात सामने आई है, लेकिन सभी चालक दल सुरक्षित हैं। यह राहत की बात जरूर है, लेकिन घटना ने समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना किसी चेतावनी के इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के लिहाज से चिंताजनक मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी अपनी रिपोर्ट में इस घटना का जिक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उस दिन कुल तीन जहाजों को निशाना बनाया गया था, जिनमें दो भारतीय थे। एक तेल टैंकर के पास ईरानी गनबोट्स पहुंचीं और बिना रेडियो संपर्क के फायरिंग शुरू कर दी। इसके कुछ समय बाद ओमान के पास एक अन्य भारतीय जहाज पर भी प्रोजेक्टाइल के टकराने की सूचना मिली। इन घटनाओं ने वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण इस मार्ग की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है।
नौसेना की तैनाती और सुरक्षा उपाय
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना ने तुरंत कदम उठाए हैं। क्षेत्र में सात युद्धपोत तैनात किए गए हैं, जो भारतीय जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट कर रहे हैं। साथ ही, जहाजों को लारक द्वीप से दूरी बनाए रखने और केवल अनुमति मिलने पर आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। नौसेना की यह तैनाती एहतियाती कदम के तौर पर देखी जा रही है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
फंसे जहाजों की स्थिति और निकासी प्रयास
वर्तमान में हॉर्मुज स्ट्रेट में करीब 14 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिनमें तेल टैंकर और एलपीजी कैरियर शामिल हैं। इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पहले भी क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर भारत 10 से अधिक जहाजों को सुरक्षित निकाल चुका है। इस बार भी सरकार और नौसेना मिलकर चरणबद्ध तरीके से शेष जहाजों की वापसी सुनिश्चित करने में जुटे हैं।
वैश्विक व्यापार मार्ग और भारत की रणनीति
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है। भारत इस मामले में सतर्क रुख अपनाते हुए कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर संतुलन बनाए हुए है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता भारतीय जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा बनी हुई है।