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NCERTBook – कक्षा आठ की पुस्तक से विवादित अध्याय वापस

NCERTBook – राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने कक्षा आठ की एक पाठ्यपुस्तक में शामिल न्यायपालिका संबंधी अध्याय को लेकर उठे विवाद के बाद उसे वापस लेने का निर्णय लिया है। परिषद ने संबंधित सामग्री पर आपत्ति सामने आने के कुछ ही समय बाद वितरण रोक दिया और इसे वेबसाइट से भी हटा दिया। साथ ही, संस्था ने सार्वजनिक रूप से खेद जताते हुए कहा है कि अध्याय को उपयुक्त परामर्श के बाद संशोधित किया जाएगा।

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खरीदारों से संपर्क, प्रतियां लौटाने का अनुरोध

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों ने हाल में यह पुस्तक खरीदी थी, उनसे सीधे संपर्क किया जा रहा है। बताया गया कि सोमवार को एनसीईआरटी काउंटर से कुल 38 प्रतियां बेची गई थीं। अगले दो दिनों में खरीदारों को फोन कर पुस्तक वापस करने के लिए कहा गया। जिन मामलों में संपर्क नंबर उपलब्ध नहीं थे, वहां डिजिटल भुगतान विवरण के आधार पर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

कर्मचारियों का कहना है कि यह कदम शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के बाद उठाया गया। मंगलवार को पुस्तक की कोई नई प्रति नहीं बेची गई, जिससे स्पष्ट है कि वितरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया था।

किस अध्याय पर उठा विवाद

विवाद ‘The Role of the Judiciary in Our Society’ शीर्षक अध्याय को लेकर सामने आया। इसमें न्यायपालिका की भूमिका के साथ-साथ लंबित मामलों और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का उल्लेख था। कुछ अंशों को लेकर आपत्ति जताई गई कि वे न्यायिक संस्थाओं की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीईआरटी ने कहा कि संबंधित अध्याय में कुछ सामग्री अनजाने में शामिल हो गई थी, जिसे अब संशोधित किया जाएगा। परिषद ने यह भी दोहराया कि वह न्यायपालिका का सम्मान करती है और उसे संविधान तथा मौलिक अधिकारों का संरक्षक मानती है।

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस विषय पर स्वतः संज्ञान लिया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा मामले का उल्लेख किए जाने के बाद अदालत ने पाठ्यपुस्तक की सामग्री पर गंभीर आपत्ति दर्ज की।

मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आने दी जाएगी। अदालत की नाराजगी के बाद एनसीईआरटी ने त्वरित कदम उठाते हुए पुस्तक को बाजार से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

संशोधन की प्रक्रिया शुरू

एनसीईआरटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संबंधित पाठ्य सामग्री की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों से परामर्श लिया जाएगा। उनका कहना है कि शैक्षणिक सामग्री तैयार करते समय तथ्यों और प्रस्तुति दोनों में संतुलन आवश्यक है। यदि किसी स्तर पर चूक हुई है, तो उसे सुधारना संस्था की जिम्मेदारी है।

शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों में संवेदनशील विषयों को शामिल करते समय भाषा और संदर्भ का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि छात्रों को संतुलित और तथ्यात्मक जानकारी मिल सके।

शिक्षा और संस्थागत सम्मान के बीच संतुलन

यह प्रकरण इस बात की याद दिलाता है कि शिक्षा सामग्री तैयार करते समय संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी और सावधानी अनिवार्य है। साथ ही, छात्रों को लोकतांत्रिक ढांचे की समझ देने के लिए तथ्यपरक जानकारी भी जरूरी है। एनसीईआरटी ने संकेत दिया है कि संशोधित संस्करण में इन दोनों पहलुओं के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया जाएगा।

फिलहाल, विवादित अध्याय को हटाकर नई सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया जारी है और आगे की कार्रवाई विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तय होगी।

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