PreSchoolRegulation – महाराष्ट्र में निजी प्री-स्कूलों के लिए नया कानून लागू करने की तैयारी
PreSchoolRegulation – महाराष्ट्र में छोटे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। राज्य सरकार निजी प्री-स्कूलों को एक स्पष्ट कानूनी ढांचे में लाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि इस क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। अक्सर देखा जाता है कि कई मोहल्लों और आवासीय इलाकों में बिना किसी स्पष्ट नियम या मानक के प्री-प्राइमरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। ऐसे में फीस, सुरक्षा और पढ़ाई के तरीकों को लेकर अभिभावकों के बीच चिंता बनी रहती है।

राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भूसे ने विधानसभा में जानकारी दी कि सरकार निजी प्री-स्कूलों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए एक नया कानून लाने की प्रक्रिया में है। इस पहल का उद्देश्य छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित शैक्षिक वातावरण सुनिश्चित करना है, साथ ही स्कूलों की जवाबदेही भी तय करना है।
प्री-स्कूलों के लिए पंजीकरण अनिवार्य करने की तैयारी
सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य में कोई भी निजी प्री-स्कूल बिना आधिकारिक पंजीकरण के संचालित नहीं हो सकेगा। शिक्षा मंत्री के अनुसार अप्रैल 2025 में जारी एक सरकारी सर्कुलर के बाद से राज्य में प्री-स्कूलों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस प्रक्रिया के तहत संस्थानों को एक ऑनलाइन पोर्टल पर अपना विवरण दर्ज कराना होता है। अब तक लगभग 12,700 से अधिक निजी प्री-प्राइमरी केंद्र इस पोर्टल पर पंजीकरण करा चुके हैं।
सरकार का मानना है कि इस डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि राज्य में कितने प्री-स्कूल संचालित हो रहे हैं और वहां बच्चों को किस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिन संस्थानों ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है, उन्हें जल्द प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।
प्रस्तावित कानून में शामिल हो सकते हैं नए नियम
नए कानून के तहत प्री-स्कूलों के संचालन के लिए कई महत्वपूर्ण मानक निर्धारित किए जाने की योजना है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रारंभिक शिक्षा के स्तर पर बच्चों को सुरक्षित और संतुलित सीखने का वातावरण मिले।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार हर प्री-स्कूल को अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा और यह पंजीकरण स्थायी नहीं रहेगा। इसे एक निश्चित अवधि के बाद नवीनीकरण कराना भी जरूरी होगा।
इसके अलावा सरकार एक विशेष प्राधिकरण नियुक्त करने की योजना बना रही है जो इन संस्थानों की निगरानी करेगा। यह प्राधिकरण स्कूलों के कामकाज, सुविधाओं और शिक्षण व्यवस्था का मूल्यांकन करेगा।
छात्र और शिक्षक अनुपात पर विशेष ध्यान
प्रस्तावित नियमों में बच्चों और शिक्षकों के अनुपात को भी महत्वपूर्ण माना गया है। प्रारंभिक शिक्षा में बच्चों को व्यक्तिगत ध्यान मिल सके, इसके लिए लगभग 20 बच्चों पर एक शिक्षक रखने का सुझाव दिया गया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का अनुपात छोटे बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बना सकता है। इससे शिक्षक प्रत्येक बच्चे के विकास और जरूरतों पर अधिक ध्यान दे पाएंगे।
इसके साथ ही पाठ्यक्रम को भी बच्चों की मानसिक और सामाजिक वृद्धि को ध्यान में रखते हुए तैयार करने की योजना है। पढ़ाई को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय खेल, गतिविधियों और रचनात्मक तरीकों के माध्यम से सीखने पर जोर दिया जाएगा।
सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर सख्त मानक
नए कानून में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को भी महत्वपूर्ण प्राथमिकता दी गई है। सरकार चाहती है कि प्री-स्कूलों का वातावरण पूरी तरह बच्चों के अनुकूल हो।
क्लासरूम, खेल क्षेत्र और अन्य सुविधाओं को सुरक्षित तथा साफ-सुथरा रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं। बच्चों के लिए आवश्यक खेल सामग्री और सीखने से जुड़ी गतिविधियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने पर विचार किया जा रहा है।
सरकार इस दिशा में अन्य राज्यों के अनुभव और सफल मॉडल का भी अध्ययन कर रही है ताकि निजी क्षेत्र में भी शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सके।
नए शैक्षणिक सत्र से लागू होने की संभावना
शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित कानून का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग से सुझाव प्राप्त होने के बाद इसे विधि एवं न्याय विभाग के पास कानूनी समीक्षा के लिए भेजा गया है।
सरकार की कोशिश है कि सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस कानून को अगले शैक्षणिक सत्र से लागू कर दिया जाए। यदि ऐसा होता है तो राज्य में प्री-प्राइमरी शिक्षा क्षेत्र में एक संगठित और नियंत्रित व्यवस्था विकसित हो सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अभिभावकों को यह भरोसा मिलेगा कि उनके बच्चे ऐसे संस्थानों में पढ़ रहे हैं जो निर्धारित मानकों का पालन करते हैं और जहां सुरक्षा तथा शिक्षा दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाता है।



