RahulGandhi – वायनाड में बहन प्रियंका संग अनबन पर बोले राहुल
RahulGandhi – कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को वायनाड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा से जुड़ा एक हल्का-फुल्का प्रसंग साझा किया। कार्यक्रम 2024 में वायनाड में हुए भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के लिए बनाए जा रहे घरों के शिलान्यास से जुड़ा था। गंभीर माहौल के बीच राहुल ने निजी जीवन का एक किस्सा सुनाकर उपस्थित लोगों को मुस्कुराने का मौका दिया।

वायनाड को बताया अपना बड़ा परिवार
राहुल गांधी ने संबोधन के दौरान वायनाड की जनता को अपना विस्तृत परिवार बताया। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि भाई-बहन के बीच छोटी-मोटी तकरार होना सामान्य बात है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि एक दिन पहले उनकी बहन उनसे नाराज थीं और बातचीत नहीं कर रही थीं। बात इतनी बढ़ी कि जब उनकी मां सोनिया गांधी ने प्रियंका का हालचाल पूछा तो उन्हें यह बताना पड़ा कि दोनों के बीच बोलचाल बंद है।
उन्होंने मंच से साझा किया कि उन्होंने इस स्थिति को हल करने के लिए एक मजाकिया योजना बनाई। राहुल के अनुसार, उन्होंने अपनी मां से कहा कि जैसे ही प्रियंका वायनाड आएंगी, वहां का माहौल उन्हें बात करने पर मजबूर कर देगा। हालांकि यात्रा के दौरान स्थिति तुरंत नहीं बदली और उड़ान में भी प्रियंका चुप रहीं, लेकिन वायनाड पहुंचते ही बातचीत फिर शुरू हो गई। राहुल ने इसे वायनाड की आत्मीयता का असर बताया।
गांधी परिवार और वायनाड का संबंध
वायनाड और गांधी परिवार का रिश्ता पिछले कुछ वर्षों में और मजबूत हुआ है। 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने वायनाड और रायबरेली, दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने वायनाड सीट छोड़ दी, जिसके बाद हुए उपचुनाव में प्रियंका गांधी वाड्रा ने यहां से जीत हासिल की और अब वह इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इस पृष्ठभूमि में राहुल का यह दौरा राजनीतिक और भावनात्मक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
भूस्खलन प्रभावितों के लिए पहल
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वायनाड में भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के लिए बनाए जा रहे आवासों की आधारशिला रखना था। राहुल गांधी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के बाद पुनर्वास कार्य केवल ढांचे खड़े करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों के जीवन को फिर से स्थिर करने की दिशा में ठोस प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के लिए हर संभव सहयोग किया जाएगा।
राजनीति में पारदर्शिता पर जोर
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने अपने राजनीतिक सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2004 से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हुए उन्हें दो दशक से अधिक का अनुभव हो चुका है। समय के साथ सोच और दृष्टिकोण में बदलाव आता है, यह स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि नेताओं को जनता के साथ अधिक खुलेपन से संवाद करना चाहिए। उनके मुताबिक, पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करती है और इससे लोगों का भरोसा कायम रहता है।
राहुल ने यह भी कहा कि राजनीतिक जीवन केवल नीतियों और भाषणों तक सीमित नहीं होता, बल्कि व्यक्तिगत अनुभव भी लोगों को जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं। वायनाड के कार्यक्रम में साझा किया गया उनका यह पारिवारिक किस्सा उसी जुड़ाव का एक उदाहरण माना जा रहा है।



