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ReservationPolicy – संयुक्त सचिव स्तर पर SC-ST प्रतिनिधित्व का अलग डेटा उपलब्ध नहीं

ReservationPolicy – केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि संयुक्त सचिव स्तर और उससे ऊपर के पदों पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिकारियों के प्रतिनिधित्व से जुड़ा अलग से कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के पास वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर इन वर्गों की भागीदारी के बारे में विशिष्ट स्तर पर वर्गीकृत डेटा मौजूद नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में आरक्षण से संबंधित मौजूदा नीतियां लागू हैं और उनका पालन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिए गए हैं।

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पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ी मौजूदा नीति

मंत्री ने संसद को बताया कि केंद्र सरकार की नीति के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान है। यह आरक्षण समूह ‘ए’ सेवाओं के प्रारंभिक स्तर तक लागू होता है। इसके तहत अनुसूचित जाति के लिए 15 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया है।

सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य प्रशासनिक सेवाओं में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। पदोन्नति की प्रक्रिया विभागीय पदोन्नति समितियों के माध्यम से तय नियमों के अनुसार की जाती है। इसी प्रक्रिया के जरिए विभिन्न सेवाओं में अधिकारियों को उच्च पदों पर पदोन्नत किया जाता है।

वरिष्ठ स्तर पर प्रतिनिधित्व को लेकर पूछे गए सवाल

लोकसभा में पूछा गया था कि क्या संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के पदों पर अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के अधिकारियों की संख्या कम है। इस प्रश्न के जवाब में मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस स्तर के पदों के लिए वर्गवार अलग से संकलित आंकड़े सरकार के पास उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि हालांकि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के पास अपने स्तर पर कर्मचारियों का डेटा मौजूद होता है, लेकिन संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के पदों के लिए विशेष रूप से वर्गीकृत राष्ट्रीय स्तर का कोई समेकित आंकड़ा तैयार नहीं किया गया है।

मंत्रालयों को दिए गए प्रशासनिक निर्देश

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने आरक्षण नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी मंत्रालयों और विभागों को कुछ प्रशासनिक निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार प्रत्येक मंत्रालय या विभाग को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए एक संपर्क अधिकारी नियुक्त करना होता है।

यह अधिकारी कम से कम अवर सचिव स्तर का होना चाहिए और उसका कार्य आरक्षण से संबंधित नियमों के पालन पर नजर रखना होता है। इसके अलावा मंत्रालयों को यह भी कहा गया है कि वे संपर्क अधिकारी के अधीन एक विशेष आरक्षण प्रकोष्ठ स्थापित करें, ताकि संबंधित मामलों की निगरानी और समन्वय अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सके।

खाली पदों को समय पर भरने के निर्देश

सरकार ने मंत्रालयों और विभागों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठक समय से पहले आयोजित करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पदोन्नति से जुड़े मामलों में देरी न हो और खाली पदों को जल्द भरा जा सके।

मंत्री के अनुसार यदि पदोन्नति प्रक्रिया समय पर पूरी की जाती है तो इससे विभिन्न सेवाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों को लागू करने में भी मदद मिलती है। इससे प्रशासनिक ढांचे में संतुलन बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

उपलब्ध आंकड़ों में कुल प्रतिनिधित्व का उल्लेख

सरकार ने यह भी बताया कि मंत्रालयों और विभागों से प्राप्त समेकित जानकारी के अनुसार 1 जनवरी 2025 तक सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का कुल प्रतिनिधित्व निर्धारित प्रतिशत से अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व 15 प्रतिशत से अधिक और अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व 7.5 प्रतिशत से ऊपर बताया गया है।

हालांकि यह आंकड़े सभी सेवाओं को मिलाकर तैयार किए गए हैं। संयुक्त सचिव स्तर और उससे ऊपर के पदों के लिए अलग से वर्गीकृत डेटा उपलब्ध नहीं होने के कारण उस स्तर पर वास्तविक प्रतिनिधित्व की स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आ पाती।

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