Sarabjit Kaur Repatriation Case: क्या प्यार, सरहद और कानूनी जंग के बीच, फिर कभी अपने वतन वापस लौट पाएगी भारत की सरबजीत…
Sarabjit Kaur Repatriation Case: प्यार की खातिर सरहदें लांघने की कहानियां अक्सर भावुक होती हैं, लेकिन जब कानून और कागजात बीच में आ जाएं, तो मुश्किलें बढ़ जाती हैं। भारतीय महिला सरबजीत सिंह कौर, जिन्होंने एक पाकिस्तानी व्यक्ति से निकाह किया था, फिलहाल अनिश्चितता के भंवर में हैं। तकनीकी खामियों के कारण उन्हें (Wagha Border) पर रोक दिया गया और अब उन्हें लाहौर के एक शेल्टर होम में भेज दिया गया है। यह मामला न केवल दो देशों के बीच के कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है, बल्कि एक महिला की व्यक्तिगत पसंद और अंतरराष्ट्रीय नियमों के बीच के संघर्ष को भी उजागर करता है।

लाहौर के शेल्टर होम में कटी सरबजीत की रात
जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों को सौंपे जाने के अंतिम फैसले तक सरबजीत को लाहौर के ‘दार-उल-अमन’ में शिफ्ट कर दिया गया है। भारतीय अधिकारियों द्वारा (Documentation Process) को पूरा करने में लग रहे समय की वजह से उनकी वतन वापसी में देरी हो रही है। अधिकारियों के बीच कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर लगातार बातचीत जारी है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। फिलहाल, सरबजीत को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है जब तक कि सौंपने की प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता।
पंजाब हाई कोर्ट में लंबित है न्याय की गुहार
सरबजीत का मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि न्यायिक पेचीदगियों में भी उलझा हुआ है। पंजाब हाई कोर्ट में इस मामले की पैरवी कर रहे वकील अली चंगेजी सिंधु ने स्पष्ट किया है कि यह विषय अभी अदालत में विचाराधीन है। पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस फारूक हैदर ने (Law Enforcement Agencies) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी, जिसमें पंजाब पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसी भी शामिल हैं। जब तक अदालत इन रिपोर्टों का अध्ययन नहीं कर लेती, तब तक कोई भी बड़ा फैसला लेना मुश्किल नजर आ रहा है।
तीर्थयात्रा से शुरू हुआ मोहब्बत का सफर
सरबजीत की कहानी पिछले साल 4 नवंबर को शुरू हुई थी, जब वह एक सिख तीर्थयात्री जत्थे के साथ पाकिस्तान पहुंची थीं। धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद उन्हें अपने ग्रुप के साथ वापस भारत आना था, लेकिन (Personal Choice) के चलते उन्होंने पाकिस्तान में ही रुकने का साहसी फैसला किया। उन्होंने वहां इस्लाम धर्म कुबूल किया और शेखूपुरा निवासी नासिर हुसैन के साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की। यह कदम उनके परिवार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए काफी चौंकाने वाला था।
सोशल मीडिया की दोस्ती और फिर निकाह
नासिर और सरबजीत का रिश्ता रातों-रात नहीं बना, बल्कि इसकी जड़ें सालों पुरानी हैं। बताया जा रहा है कि 2016 में सोशल मीडिया के माध्यम से इन दोनों की पहली मुलाकात डिजिटल दुनिया में हुई थी। वर्षों की बातचीत के बाद यह दोस्ती गहरी मोहब्बत में बदल गई, जिसने सरबजीत को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। धर्म परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना नाम नूर रख लिया और (Social Media Relationship) को एक नया नाम देते हुए निकाह कर लिया।
फॉरेनर्स एक्ट के उल्लंघन का बड़ा आरोप
पाकिस्तान में सरबजीत की मौजूदगी को लेकर आधिकारिक जांच तब शुरू हुई जब उनके वीजा की अवधि और कानूनी स्थिति पर सवाल उठे। उनके वकील अहमद हसन पाशा ने जानकारी दी कि (Foreigners Act 1946) के तहत किसी भी विदेशी नागरिक को बिना वैध परमिट के अधिक समय तक रुकने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसी कानून की वजह से सरबजीत को वापस भारत भेजने की व्यवस्था की जा रही है, क्योंकि कानूनी तौर पर उनका रुकना अवैध माना गया है।
क्या स्पाउस वीजा बनेगा दोबारा वापसी का जरिया
सरबजीत के वकील का मानना है कि वर्तमान स्थिति में उनकी भारत वापसी ही एकमात्र कानूनी रास्ता है। हालांकि, भविष्य के लिए उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं। एक बार जब वह भारत लौट जाएंगी, तो वह (Visa Application) की प्रक्रिया के माध्यम से स्पाउस वीजा के लिए आवेदन कर सकती हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि कागजात सही रहे, तो वह स्थायी निवास के लिए आवेदन कर दोबारा पाकिस्तान में अपने शौहर के पास लौट सकती हैं।
मानवीय संवेदनाओं और कानूनों के बीच फंसी जिंदगी
फिलहाल सरबजीत की किस्मत फाइलों और अदालतों के बीच अटकी हुई है। यह मामला दर्शाता है कि डिजिटल युग में सरहदें भले ही धुंधली हो जाएं, लेकिन (Legal Sovereignty) आज भी उतनी ही सख्त है। दोनों देशों के अधिकारी इस संवेदनशील मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना यह है कि सरबजीत को कितनी जल्दी भारतीय अधिकारियों को सौंपा जाता है और क्या वह भविष्य में कानूनी रूप से अपनी पसंद की जगह पर रह पाएंगी।



