Asaduddin Owaisi statement: म्यांमार सीमा पर 16 भारतीयों को गुलामी में धकेले जाने का ओवैसी ने किया खुलासा
Asaduddin Owaisi statement: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में एक गंभीर और चौंकाने वाली घटना की जानकारी सार्वजनिक की है, जिसने विदेश में नौकरी की तलाश में जाने वाले भारतीय युवाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओवैसी के अनुसार, 16 भारतीय नागरिकों को थाईलैंड में नौकरी दिलाने का झांसा देकर म्यांमार-थाईलैंड सीमा क्षेत्र में ले जाया गया, जहां उन्हें जबरन गुलामी जैसी परिस्थितियों में काम करने को मजबूर किया जा रहा है। इन पीड़ितों में हैदराबाद के तीन लोग भी शामिल हैं, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है।

नौकरी के नाम पर रची गई साजिश
असदुद्दीन ओवैसी ने बताया कि इन भारतीय नागरिकों को बेहतर नौकरी और अच्छी सैलरी का सपना दिखाया गया था। एजेंटों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि थाईलैंड में सुरक्षित और सम्मानजनक काम मिलेगा। लेकिन वहां पहुंचते ही उनकी किस्मत बदल गई। उन्हें म्यांमार-थाईलैंड सीमा के पास ऐसे इलाकों में ले जाया गया, जहां कानून का कोई डर नहीं है और मानव तस्करी जैसे अपराध खुलेआम किए जाते हैं।
18 से 20 घंटे तक कराया जा रहा जबरन काम
ओवैसी के मुताबिक, इन भारतीयों से रोजाना 18 से 20 घंटे तक काम कराया जा रहा है। काम की परिस्थितियां बेहद अमानवीय हैं। विरोध करने पर शारीरिक यातना दी जाती है और मानसिक रूप से भी उन्हें तोड़ा जा रहा है। पीड़ितों के पासपोर्ट और मोबाइल फोन छीन लिए गए हैं, ताकि वे बाहर की दुनिया से संपर्क न कर सकें। इतना ही नहीं, बीमार पड़ने पर उन्हें कोई मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
हैदराबाद के मीर सज्जाद अली की आपबीती
ओवैसी ने यह जानकारी हैदराबाद के उस्मान नगर निवासी मीर सज्जाद अली से हासिल की है, जो फिलहाल वहां कैद हैं। मीर सज्जाद के साथ मौला अली और बंजारा हिल्स के दो अन्य युवक भी फंसे हुए हैं। मीर सज्जाद ने किसी तरह संपर्क कर अपनी स्थिति की जानकारी दी, जिसके बाद यह मामला सामने आ सका।
मां की गुहार और दर्द भरी कहानी
पीड़ित मीर सज्जाद अली की मां नाजिया फातिमा ने एएनआई से बातचीत में अपने बेटे की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि उनका बेटा करीब छह महीने पहले विदेश नौकरी के लिए गया था। शुरुआत में वह संपर्क में था, लेकिन डेढ़ महीने बाद अचानक उसका फोन बंद हो गया। करीब दो महीने बाद जब उसका फोन आया तो उसने रोते हुए बताया कि उन्हें थाईलैंड बुलाकर आंखों पर पट्टी बांध दी गई और जबरन काम पर लगा दिया गया। बाद में वहां सेना पहुंची और उनका फोन व निजी सामान छीन लिया गया।
विदेश मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि सभी फंसे हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षित और जल्द से जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाए। ओवैसी का कहना है कि यह सिर्फ एक राज्य या एक परिवार का मामला नहीं है, बल्कि पूरे देश के युवाओं की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।
मानव तस्करी के बढ़ते खतरे की ओर इशारा
यह घटना एक बार फिर मानव तस्करी और फर्जी विदेशी नौकरी घोटालों की गंभीर समस्या को उजागर करती है। म्यांमार-थाईलैंड सीमा क्षेत्र पहले भी ऐसे मामलों के लिए बदनाम रहा है, जहां विदेशी नागरिकों को अवैध गतिविधियों में जबरन शामिल किया जाता है। कई बार भारतीय नागरिकों को भी इस तरह फंसाया गया है और दूतावास की मदद से उन्हें वापस लाया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
ओवैसी की अपील और मीडिया में खबरें आने के बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय इस मामले को गंभीरता से लेकर जल्द कार्रवाई करेंगे, ताकि उनके अपने सुरक्षित घर लौट सकें।



