UAEVisit – यूरोप दौरे के बीच ये हो सकता है पीएम मोदी का संभावित यूएई पड़ाव
UAEVisit – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने अपने निर्धारित यूरोप दौरे के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में एक संक्षिप्त ठहराव कर सकते हैं। इस संभावित यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस कार्यक्रम को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और दोनों देशों के बीच यात्रा की रूपरेखा पर काम जारी है।

यूरोप यात्रा के बीच अहम पड़ाव
प्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई के बीच नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड और इटली के दौरे पर रहेंगे। इस यात्रा का प्रमुख केंद्र ओस्लो में आयोजित भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन होगा, जहां क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। यूरोपीय संघ के साथ हाल में हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद यह उनका पहला यूरोप दौरा माना जा रहा है, जिससे इस यात्रा का महत्व और बढ़ जाता है। इसी क्रम में यूएई में संभावित रुकावट को भी कूटनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी संवाद
पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारत और यूएई के बीच उच्च-स्तरीय संपर्क लगातार बना हुआ है। हाल के महीनों में दोनों देशों के वरिष्ठ नेताओं के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। यूएई के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती मिली थी। इसके अलावा, विदेश मंत्री स्तर से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तक के स्तर पर संवाद जारी रहा है, जो द्विपक्षीय संबंधों की निरंतरता को दर्शाता है।
हाल के दौरों ने बढ़ाई सक्रियता
मार्च और अप्रैल के दौरान भी दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। यूएई की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री ने भारत का दौरा किया, वहीं भारत के विदेश मंत्री ने अबू धाबी जाकर राष्ट्रपति और अपने समकक्ष से मुलाकात की। इन बैठकों में ऊर्जा, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की यूएई यात्रा ने भी इस सहयोग को आगे बढ़ाया, जिसमें सुरक्षा और रणनीतिक विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
आर्थिक रिश्तों में तेजी
भारत और यूएई के बीच आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है और 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। दोनों देशों ने आने वाले वर्षों में इस आंकड़े को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। यूएई भारत के प्रमुख निवेशकों में शामिल है और बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में उसकी भागीदारी बढ़ रही है।
ऊर्जा सहयोग बना प्रमुख आधार
ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। हाल ही में दीर्घकालिक एलएनजी आपूर्ति समझौते ने इस साझेदारी को नई दिशा दी है। इसके तहत आने वाले वर्षों में यूएई भारत को बड़े पैमाने पर गैस की आपूर्ति करेगा। साथ ही, वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलावों के बीच यूएई की नीतियों का असर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
भारत और यूएई के संबंध अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों के बीच दोनों देश एक-दूसरे के साथ समन्वय बढ़ा रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का संभावित यूएई दौरा इस साझेदारी को और मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।