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UniversityRow – सोनीपत यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर निलंबित

UniversityRow – हरियाणा के सोनीपत स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में एक एसोसिएट प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि कक्षा के दौरान प्रधानमंत्री को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर विवादित बयान दिए गए। मामला तब सामने आया जब एक छात्र के परिवार ने इसे लेकर हरियाणा मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के बाद प्रोफेसर को एक सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया है।

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शिकायत से खुला विवाद

जानकारी के अनुसार, प्रथम वर्ष के छात्र विख्यात बजाज ने 31 अक्टूबर को ‘उरी: सर्जिकल स्ट्राइक’ विषय पर एक निबंध लिखा था। छात्र के पिता विश्व बजाज का आरोप है कि निबंध की सामग्री कुछ शिक्षकों को पसंद नहीं आई। उनका कहना है कि 3 नवंबर को कक्षा में छात्र के साथ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार किया गया।

इसके बाद 7 नवंबर को ‘प्रतिनिधित्व की राजनीति’ नामक पाठ्यक्रम के दौरान कथित तौर पर ऐसी टिप्पणियां की गईं, जिन्हें परिवार ने राजनीतिक रूप से आपत्तिजनक और असंवेदनशील बताया। शिकायत में कहा गया कि प्रधानमंत्री की तुलना जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर से की गई और सुरक्षा अभियानों को केवल दिखावा बताया गया।

छात्र के साथ व्यवहार पर सवाल

छात्र के पिता का आरोप है कि उनके बेटे ने अपने लेख में भारत सरकार और सेना की प्रशंसा की थी, जिसके बाद उसे निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि निबंध के कारण उसे कक्षा में अपमानित किया गया और संबंधित विषय में अनुत्तीर्ण कर दिया गया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि लगातार टिप्पणियों और व्यवहार से छात्र का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। बाद में छात्र ने विश्वविद्यालय के चांसलर को लिखित शिकायत दी। इसके बाद डीन स्तर पर जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि छात्र को फेल करना उचित नहीं था और उसे आंतरिक परीक्षा के माध्यम से पास कर दिया गया।

मानवाधिकार आयोग में मामला

परिवार ने मामले को हरियाणा मानवाधिकार आयोग तक पहुंचाया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि छात्र के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया, जिससे उसके शैक्षणिक प्रदर्शन और मानसिक स्थिति पर असर पड़ा।

आयोग ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब तलब किया है और कुलपति को निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 13 मई को तय की गई है। आयोग की प्रक्रिया जारी है।

विश्वविद्यालय का पक्ष

विश्वविद्यालय की मुख्य संचार अधिकारी ने बयान जारी कर कहा कि मामला मानवाधिकार आयोग के समक्ष विचाराधीन है और संस्थान पूरी तरह सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार सभी आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि आंतरिक जांच के आधार पर संबंधित प्रोफेसर को एक सेमेस्टर के लिए निलंबित किया गया है। विश्वविद्यालय ने कहा कि शैक्षणिक वातावरण में अनुशासन और संतुलन बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।

व्यापक बहस का विषय

यह मामला अकादमिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की सीमा और कक्षा में संवाद की मर्यादा जैसे सवालों को भी सामने लाता है। शिक्षा संस्थानों में विविध विचारों के बीच संतुलन कैसे कायम रखा जाए, इस पर अक्सर बहस होती रही है।

फिलहाल, पूरा मामला जांच प्रक्रिया के अधीन है। आयोग और विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

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