WestBengalElection – बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने तेज की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया
WestBengalElection – पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में गुरुवार को दिल्ली में पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक आयोजित की गई। जानकारी के अनुसार इस बैठक में राज्य की कई सीटों पर उम्मीदवारों के नामों पर गंभीर चर्चा हुई और करीब 140 सीटों के लिए संभावित प्रत्याशियों पर सहमति बन चुकी है। माना जा रहा है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अप्रैल के अंत तक हो सकती है, इसलिए पार्टी जल्द ही उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने की तैयारी में है।

प्रधानमंत्री आवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक
दिल्ली में हुई यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई। आमतौर पर इस तरह की रणनीतिक बैठकें पार्टी मुख्यालय में होती रही हैं, लेकिन इस बार स्थान में बदलाव देखने को मिला। बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरण, संगठन की स्थिति और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विस्तार से चर्चा की।
यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद यह केंद्रीय चुनाव समिति की पहली औपचारिक बैठक थी। सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन में सावधानी बरत रहा है।
लगभग आधी सीटों पर बन चुकी है सहमति
पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं और पार्टी सूत्रों का कहना है कि इनमें से लगभग आधी सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर सहमति बन चुकी है। भाजपा की कोशिश है कि वह अन्य दलों से पहले अपनी पहली सूची जारी करके चुनावी माहौल में बढ़त हासिल करे।
प्रारंभिक सूची में कुछ प्रमुख नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं। इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक और राज्य के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी का नाम चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि इस बार पार्टी की रणनीति में एक बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि मौजूदा सांसदों को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने से परहेज किया जाएगा।
2021 के चुनाव के बाद बदली राजनीतिक स्थिति
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटों पर जीत दर्ज कर राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। लेकिन समय के साथ कुछ विधायकों के दल बदलने के कारण पार्टी की संख्या घटकर 65 रह गई है। इसके बावजूद संगठन स्तर पर भाजपा अपने ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वर्तमान विधायकों में से अधिकांश को दोबारा टिकट दिया जा सकता है। नेतृत्व का मानना है कि जिन नेताओं ने क्षेत्र में सक्रियता बनाए रखी है और संगठन के साथ जुड़े रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता मिल सकती है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी मजबूत रहेगा और संगठनात्मक स्थिरता बनी रहेगी।
इस बार दलबदलुओं और सिलेब्रिटी उम्मीदवारों से दूरी
इस चुनाव में भाजपा की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी बताया जा रहा है कि पार्टी उन लोगों को कम प्राथमिकता देगी जो हाल के वर्षों में अन्य दलों से आकर जुड़े हैं। 2021 के चुनाव में भाजपा ने कई ऐसे नेताओं और कुछ सिनेमा जगत से जुड़े चेहरों को टिकट दिया था, जो बाद में सक्रिय राजनीति से दूर हो गए या दूसरी पार्टियों में चले गए।
इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार पार्टी पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे लाने पर जोर दे रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि लंबे समय से संगठन के साथ काम कर रहे नेताओं को मौका देने से कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा और चुनावी अभियान में ऊर्जा भी बनी रहेगी।
उम्मीदवार चयन में कई पहलुओं पर हो रहा विचार
सूत्रों के अनुसार उम्मीदवारों का चयन करते समय केवल जीत की संभावना ही नहीं बल्कि संगठनात्मक क्षमता, स्थानीय सामाजिक समीकरण और क्षेत्र में सक्रियता जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है। पार्टी चाहती है कि ऐसे उम्मीदवार मैदान में उतरें जो क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हों और चुनाव प्रचार के दौरान प्रभावी भूमिका निभा सकें।
इसी बीच भाजपा ने राज्य में चुनावी अभियान भी धीरे-धीरे तेज करना शुरू कर दिया है। हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। इस घोषणा को पार्टी ने अपने प्रमुख चुनावी वादों में शामिल किया है।



