AIAssistedRescue – इंस्टाग्राम अलर्ट ने बेहद आसानी से बचा ली युवक की जान
AIAssistedRescue – अमरोहा में शुक्रवार सुबह एक 22 वर्षीय युवक की जान समय रहते बचा ली गई। यह संभव हुआ सोशल मीडिया पर सक्रिय निगरानी तंत्र और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से। युवक ने इंस्टाग्राम पर हाथ में कीटनाशक की शीशी लेकर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसके कैप्शन में जीवन समाप्त करने जैसा संकेत था। पोस्ट अपलोड होते ही मेटा के एआई आधारित सिस्टम ने संभावित खतरे को पहचान लिया और तुरंत उत्तर प्रदेश पुलिस को अलर्ट भेज दिया।

युवक रजबपुर थाना क्षेत्र का निवासी है और बीएससी स्नातक बताया जा रहा है। वीडियो में उसके हाव-भाव और लिखे संदेश से आत्मघाती इरादे की आशंका स्पष्ट हो रही थी।
रियल-टाइम अलर्ट से सक्रिय हुई पुलिस
सुबह करीब 10:14 बजे मेटा की ओर से लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय के सोशल मीडिया सेंटर को सूचना मिली। अलर्ट मिलते ही संबंधित विवरण, जिसमें संभावित लोकेशन और संपर्क जानकारी शामिल थी, तुरंत रजबपुर थाना पुलिस को भेजा गया।
मुख्यालय के निर्देश पर स्थानीय पुलिस टीम तुरंत सक्रिय हुई और लोकेशन ट्रैक कर करीब 10:24 बजे युवक के घर पहुंच गई। महज दस मिनट के भीतर की गई इस कार्रवाई ने हालात बदल दिए।
मौके पर क्या मिला
पुलिस जब घर पहुंची, तब युवक के पास कीटनाशक की शीशी मौजूद थी और उसकी मानसिक स्थिति अस्थिर लग रही थी। परिवार के सहयोग से उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने समय रहते उपचार शुरू किया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि कुछ मिनट की भी देरी होती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
अवसाद बना कारण
अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद युवक ने पुलिस को बताया कि वह लंबे समय से नौकरी की तैयारी कर रहा था। विभिन्न सरकारी भर्तियों में प्रयास करने के बावजूद सफलता न मिलने से वह मानसिक दबाव में था। भविष्य को लेकर असमंजस और निराशा ने उसे यह कदम उठाने की ओर धकेला।
पुलिस ने युवक की काउंसलिंग कर उसे परामर्श दिया और परिवार को भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह दी। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में समय पर संवाद और सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
पुलिस और मेटा के बीच समझौता
जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने बताया कि वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश पुलिस और मेटा के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत यदि फेसबुक या इंस्टाग्राम पर कोई उपयोगकर्ता आत्महत्या या आत्म-क्षति से संबंधित सामग्री पोस्ट करता है, तो कंपनी का सिस्टम उसे संभावित जोखिम के रूप में चिन्हित कर पुलिस को सूचित करता है।
अधिकारियों के अनुसार, 1 जनवरी 2023 से 15 फरवरी 2026 तक इस तंत्र के माध्यम से प्रदेश में 2106 लोगों को आत्महत्या के प्रयास से बचाया गया है।
तकनीक और त्वरित प्रतिक्रिया की भूमिका
यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और कानून-व्यवस्था तंत्र के बीच समन्वय जीवनरक्षक साबित हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर समाज में जागरूकता और समर्थन तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
अमरोहा की यह घटना इस बात का उदाहरण बन गई है कि समय पर मिली सूचना और तेज कार्रवाई किस तरह एक जीवन बचा सकती है।



