BLODeath – एसआईआर ड्यूटी के बीच शिक्षक की मौत से सवाल
BLODeath – उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण अभियान के बीच दो अलग-अलग जिलों से सामने आई घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फतेहपुर में एक बीएलओ द्वारा आत्महत्या किए जाने के एक दिन बाद मुरादाबाद में बीएलओ ड्यूटी निभा रहे एक शिक्षक की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। दोनों मामलों में परिजनों ने कार्य के दबाव को वजह बताया है, हालांकि प्रशासन ने आरोपों से इनकार किया है।

मुरादाबाद में शिक्षक की मौत
मुरादाबाद के सोनकपुर हरथला क्षेत्र में रहने वाले जाकिर हुसैन प्राथमिक विद्यालय नवाबपुरा में सहायक अध्यापक थे। उन्हें ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर अभियान के तहत बीएलओ की जिम्मेदारी दी गई थी। शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे वह अपने कार्य में व्यस्त थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल ले जाने से पहले ही उनका निधन हो गया। परिवार के मुताबिक उन्हें दिल का दौरा पड़ा।
परिजनों ने लगाया दबाव का आरोप
जाकिर हुसैन की पत्नी शहाना बी ने जिला निर्वाचन अधिकारी और जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कहा है कि एसआईआर अभियान के दौरान काम का बोझ अत्यधिक था। उनका दावा है कि देर रात तक काम करने और निरंतर दबाव की वजह से ही उनके पति की तबीयत बिगड़ी। उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी बेटी की शादी 28 मार्च को तय है और घर में तैयारियां चल रही थीं। परिवार का कहना है कि ऐसे समय में लगातार ड्यूटी ने मानसिक तनाव बढ़ाया।
प्रशासन ने दी सफाई
उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जाकिर हुसैन का कार्य संतोषजनक था और उन्हें कभी किसी प्रकार का नोटिस जारी नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है और किसी कर्मचारी पर अनावश्यक दबाव नहीं डाला जा रहा। प्रशासन ने घटना को दुखद बताया, लेकिन इसे कार्य से जोड़ने से इनकार किया है।
फतेहपुर की घटना ने बढ़ाई चिंता
इससे पहले फतेहपुर जिले के आलियाबाद गांव में एक शिक्षामित्र बीएलओ ने विद्यालय परिसर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। पुलिस के अनुसार, मौके से मिले कथित सुसाइड नोट में अवकाश न मिलने और ड्यूटी के दबाव का उल्लेख था। मृतक की बेटी की शादी आठ मार्च को निर्धारित थी और घर में तैयारियां चल रही थीं। परिजनों ने आरोप लगाया कि शादी की वजह से छुट्टी मांगे जाने के बावजूद अनुमति नहीं दी गई।
चुनावी अभियान और कर्मचारियों की स्थिति
मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को बीएलओ की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। यह प्रक्रिया समयबद्ध होती है और निर्धारित लक्ष्य पूरे करने होते हैं। हालांकि हाल की घटनाओं के बाद कर्मचारियों के कार्यभार और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने भी कार्य के संतुलित बंटवारे और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है।
दोनों घटनाओं ने प्रशासनिक तंत्र को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। जहां एक ओर चुनावी प्रक्रिया को सुचारु रखना जरूरी है, वहीं कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल संबंधित जिलों में जांच और प्रशासनिक समीक्षा की प्रक्रिया जारी है।



