उत्तर प्रदेश

Ease of Doing Business – यूपी सरकार ने पेश किए 22 बड़े सुधारों के प्रस्ताव

Ease of Doing Business – उत्तर प्रदेश में Ease of Doing Business में नंबर एक का दर्जा हासिल करने के बाद अब राज्य सरकार ने अपने सुधारों के दूसरे चरण का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे Ease of Doing Business 2.0 कहा जा रहा है, जिसमें कुल 22 प्राथमिक सुधार शामिल हैं। इन सुधारों का असर किसानों, व्यापारियों, उद्योगपतियों, शिक्षा संस्थानों और स्वास्थ्य क्षेत्र पर सीधे पड़ेगा। इन पहलुओं के लागू होने के बाद लोगों को मंजूरी, अनुमति और निरीक्षण के लंबे और जटिल प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।

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किसानों और भूमि उपयोग में बड़ी छूट

इस चरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भूमि और निर्माण से जुड़े सुधार हैं। अब किसान और जमीन मालिक अपनी जमीन के उपयोग को बदलने के लिए लंबे दस्तावेजी प्रक्रियाओं में नहीं उलझेंगे। यानी खेती की जमीन को शिक्षा, उद्योग या अन्य उपयोग के लिए बदलने में आसानी होगी। सरकार की नीति यह है कि “सभी उपयोग अनुमत हैं जब तक कि विशेष रूप से प्रतिबंधित न हों”

इसके तहत मास्टर प्लान में ही निर्माण की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे निवेशकों का समय और लागत दोनों बचेंगे और प्रदेश में नए उद्योग और व्यापारिक इकाइयों का विस्तार तेज होगा।

प्रशासनिक सुधार और डिजिटल अपील प्रणाली

सिंगल विंडो सिस्टम में सुधार करके अब सभी सेवाओं का डिजिटल ट्रैक रखने की योजना बनाई गई है। इसके तहत सरकारी नियम, कानून और आदेशों का एक डिजिटल रिपॉजिटरी तैयार होगा। ऑटो-अपील सिस्टम से लोगों को त्वरित न्याय मिलेगा और उनके मामलों का निपटारा पहले से तेज होगा।

भवन और निर्माण प्रक्रियाओं में आसानियाँ

भवन निर्माण और अनुमति प्रक्रियाओं को सरल किया जाएगा। नक्शा पास कराने, अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन और अन्य तकनीकी अनुमोदनों में छूट दी जाएगी। अग्नि सुरक्षा नियमों को सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर तर्कसंगत किया जाएगा ताकि सुरक्षा बनी रहे, लेकिन बेवजह की कठोरता समाप्त हो।

उच्च स्तरीय कमेटी का गठन

मुख्य सचिव के आदेश पर 27 जनवरी को प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद ने सचिव आवास डॉ. बलकार सिंह की अध्यक्षता में एक प्रदेश स्तरीय कमेटी का गठन किया। इसमें लखनऊ, गाजियाबाद और वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, मुख्य नगर और ग्राम नियोजक और आवास बंधु के निदेशक शामिल हैं। यह कमेटी सुधारों की निगरानी और प्रस्तावों को लागू करने में अहम भूमिका निभाएगी।

व्यापार और लाइसेंसिंग सुधार

व्यापारिक लाइसेंसिंग में दोहरे लाइसेंस सिस्टम को समाप्त किया जाएगा। दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के नियम सरल होंगे। औद्योगिक क्लस्टरों में सभी अनुमोदन अब राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से होंगे। MSME उद्यमों को स्व-घोषणा, स्थापना पूर्व अनुमोदन और निरीक्षण से राहत मिलेगी, जिससे उन्हें भरोसा और सुरक्षा दोनों मिलेंगे।

शिक्षा क्षेत्र में सुधार

शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। निजी स्कूलों के लिए न्यूनतम भूमि स्वामित्व की बाध्यता हटाई गई है। बुनियादी ढांचे और उपकरणों की शर्तों में भी आसानियाँ की गई हैं। निजी विश्वविद्यालयों के लिए भूमि आवश्यकता और एंडोमेंट फंड की शर्तों को घटाया गया है। गैर-सरकारी सहायता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए मानक सरल किए गए हैं, जिससे शिक्षा में निवेश बढ़ सके।

स्वास्थ्य और बिजली कनेक्शन की आसान प्रक्रिया

स्वास्थ्य क्षेत्र में सभी विशेष लाइसेंसों के लिए एकल नोडल एजेंसी होगी। डॉक्टरों के पंजीकरण और एनओसी की प्रक्रिया सरल होगी। बिजली कनेक्शन बहुत जल्दी मिलेगा और पर्यावरणीय मंजूरी व एनओसी के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा।

प्रस्ताव लागू करने की समयसीमा

लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इस दूसरे चरण के सुधारों के प्रस्तावों को अगले दो महीनों में लागू करने की योजना है। इन सुधारों से प्रदेश में व्यापार, उद्योग और निवेश की प्रक्रिया काफी सरल और तेज होगी।

इन सुधारों का असर केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं को भी अधिक सुगम और पारदर्शी बनाएगा।

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