उत्तर प्रदेश

Education – सरकारी स्कूलों में वार्षिक पुरस्कार समारोह, छात्रों को मिलेगा प्रोत्साहन

Education – उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। अब प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को भी निजी और कॉन्वेंट स्कूलों की तरह वार्षिक पुरस्कार समारोह के माध्यम से सम्मानित किया जाएगा। सरकार ने ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए 5 करोड़ 7 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इस योजना के तहत 232 से अधिक नामांकन वाले सभी सरकारी विद्यालयों में भव्य पुरस्कार वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि छात्रों में पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के प्रति उत्साह बढ़ाया जा सके।

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कॉन्वेंट स्कूलों की तरह होगा प्रतिभा का सम्मान

निजी और कॉन्वेंट स्कूलों में छात्रों की उपलब्धियों को विशेष तरीके से सम्मानित किया जाता है, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सरकारी विद्यालयों में भी ऐसी परंपरा शुरू करने का निर्णय लिया है।

बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार इस पहल के लिए सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि जब बच्चों को सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलेगा तो उनमें सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा और पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी भागीदारी बढ़ेगी।

पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में उत्कृष्टता पर भी पुरस्कार

इस योजना के तहत पुरस्कार केवल कक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा। खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया जाएगा।

इसके अलावा जिन छात्रों की पूरे वर्ष शत-प्रतिशत उपस्थिति रहेगी, उन्हें भी विशेष रूप से सम्मान दिया जाएगा। ऐसे विद्यार्थियों को स्टार छात्र के रूप में पहचान दी जाएगी। पुरस्कार स्वरूप ट्रॉफी, शील्ड, स्कूल बैग, पानी की बोतल और उपयोगी स्टेशनरी सामग्री जैसे पेंसिल, रंग और ड्राइंग नोटबुक प्रदान किए जाएंगे। साथ ही प्रेरक पुस्तकें भी दी जाएंगी ताकि बच्चों को पढ़ने और सीखने के लिए प्रोत्साहन मिल सके।

पेरेंट-टीचर मीटिंग से बढ़ेगा संवाद

सरकारी स्कूलों में अब निजी स्कूलों की तरह अभिभावक और शिक्षकों के बीच संवाद को भी मजबूत बनाने की योजना है। इसके लिए नियमित पेरेंट-टीचर मीटिंग आयोजित की जाएंगी, जिसमें बच्चों की पढ़ाई, व्यवहार और प्रगति पर चर्चा होगी।

इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अभिभावक भी बच्चों की शिक्षा में सक्रिय रूप से शामिल हों। जब माता-पिता और शिक्षक मिलकर बच्चों के विकास पर ध्यान देंगे, तो शिक्षा की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिल सकता है।

अभिभावकों और समिति सदस्यों को भी मिलेगा सम्मान

इस कार्यक्रम की एक विशेष बात यह भी है कि इसमें केवल छात्रों को ही नहीं बल्कि उनके अभिभावकों को भी मंच पर सम्मानित किया जाएगा। ऐसे माता-पिता जो अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजते हैं और उनकी पढ़ाई में रुचि लेते हैं, उन्हें शॉल, स्मृति चिन्ह या पौधा देकर सम्मानित किया जाएगा।

इसके अलावा विद्यालय प्रबंधन समिति के सक्रिय सदस्यों को भी कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया जाएगा। इससे स्कूल और समुदाय के बीच सहयोग बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनेगा।

छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के अनुसार इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के मन में मौजूद हीन भावना को दूर करना है। अक्सर यह देखा जाता है कि बड़े आयोजन और सम्मान समारोह केवल निजी स्कूलों तक सीमित रहते हैं।

उन्होंने कहा कि जब सरकारी स्कूल का छात्र भी मंच पर आकर पुरस्कार प्राप्त करेगा, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह आगे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से न केवल छात्रों की उपस्थिति बढ़ेगी, बल्कि पढ़ाई के स्तर में भी सुधार होगा और सरकारी विद्यालयों की छवि में सकारात्मक बदलाव आएगा।

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